नगर के किला स्थित स्लम बस्ती के बच्चों तक नहीं पहुंचा शिक्षा का प्रकाश

नगर के किला स्थित दलित बस्ती के तकरीबन 350 बच्चों का शिक्षा से कोई रिश्ता नही हैं. जहां के बच्चे अभी तक विद्यालय नहीं पहुंच पाये हैं.

बक्सर. नगर के किला स्थित दलित बस्ती के तकरीबन 350 बच्चों का शिक्षा से कोई रिश्ता नही हैं. जहां के बच्चे अभी तक विद्यालय नहीं पहुंच पाये हैं. जबकि जिले में शिक्षा विभाग के द्धारा विद्यालय से दूर रहने वाले बच्चों को डोर टू डोर संपर्क कर संबंधित पोषण क्षेत्र के विद्यालय के शिक्षक बच्चों को विद्यालय से जोड़ने की पहल करेंगे. लेकिन सरकार की यह योजना भी इस स्लम बस्ती के बच्चों को नसीब नहीं हो रही है. यह कोई सुदुरवर्ती क्षेत्र का बस्ती नहीं बल्कि शहर के बीचों बीच बसा बस्ती है. वहीं किला परिसर में भी तीन विद्यालय विभिन्न नामों से संचालित हो रहे हैं. इन विद्यालयों के शिक्षकों द्धारा भी अबतक पहल नहीं की गई है. जिसके कारण स्लम बस्ती के 350 की संख्या में बच्चे विद्यालयी शिक्षा से काफी दूर हैं. इसके साथ ही इस बस्ती के सभी लोग मेहनत मजदूरी कर प्रतिदिन भोजन व परिवार को चलाने के लिए घरों से बाहर रहते हैं. जिसके कारण उनके छोटे बच्चे दूर स्थित आंगनबाड़ी व विद्यालयों में नहीं पहुंच पाते हैं. इस मामले को टालते हुए सर्व शिक्षा अभियान डीपीओ चंदन कुमार ने कहा कि इसके लिए टोला सेवक कार्य करते हैं.

स्लम बस्ती की आबादी करीब एक हजार : किला स्थित स्लम बस्ती की आबादी लगभग एक हजार से अधिक की है. जहां शिक्षा का लेशमात्र भी नहीं पहुंचा है. जिसके कारण इस बस्ती के बच्चे अभी भी निरक्षर बने हुए हैं. इस बस्ती में न ही पोषण क्षेत्र के विद्यालय के शिक्षक ही पहुंंच रहे हैं और न ही डोर टू डोर विद्यालय से जोड़ने की योजना के तहत ही कोई अभियान चलाया गया है. जिससे इस स्लम बस्ती के लोगों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जा सकें. वहीं इस बस्ती के बच्चे कम ही उम्र में कचरा से कबाड़ बटोरने का कार्य शुरू कर परिवार के सहयोग में जुट जाते हैं.

कहते हैं स्लब बस्ती के निवासी : इस बस्ती में बच्चों के शिक्षा को लेकर कोई विद्यालय व आंगनबाड़ी नहीं है. प्रतिदिन मजदूरी कर खाने पीने वाले हम लोग है. विद्यालय सड़क से होकर जाना पड़ता है. जिससे किसी अनहोनी को देखते हुए नहीं जाने देते है. वहीं अपने कामों के लिए सुबह में उन लोगों को घर से जाना पड़ता है. बच्चों को विद्यालय प्रतिदिन ले जाना व ले आना मुश्किल कार्य है.

रमावती देवी, स्लम बस्ती निवासी

इस बस्ती में शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है. जिसके कारण इस बड़े आबादी के बच्चे पढ़ लिख नहीं पाते हैं. सभी निरक्षर है. बच्चों की आबादी करीब 350 के करीब है. शिक्षा की कमी के कारण छोटे उम्र में ही कचरा से कबाड़ी चुनने का कार्य शुरू कर देते है.

बिकाउ यादव

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