buxar news : 2020 से लेकर 2024 तक पराली जलाने पर जिले के 3011 किसानों का निबंधन हुआ रद्द

buxar news : ड्रोन से निगरानी में प्रत्येक साल फसल अवशेष जलाने के बढ़ रहे मामले

buxar news : बक्सर. जिले में फसल अवशेष जलाने के बढ़ते मामले प्रशासन और कृषि विभाग के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है. वर्ष 2020 से लेकर 2024 तक फसल अवशेष जलाने के मामलों में न केवल वृद्धि दर्ज की गयी है, बल्कि इसके चलते अब तक कुल 3011 किसानों का निबंधन रद्द किया जा चुका है.

कृषि विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गये आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि जागरूकता अभियानों और दंडात्मक कार्रवाई के बावजूद खेतों में पराली जलाने की प्रवृत्ति थमने का नाम नहीं ले रही है. कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020 में खरीफ मौसम के दौरान जिले में 207 किसानों द्वारा फसल अवशेष जलाने की पुष्टि हुई थी. इसके बाद हर वर्ष यह संख्या बढ़ती चली गयी. 2021 और 2022 में यह आंकड़ा और ऊपर गया, जबकि वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 731 तक पहुंच गयी. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि चार वर्षों के भीतर फसल अवशेष जलाने की घटनाओं में लगभग साढ़े तीन गुना की वृद्धि हुई है, जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है.

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फसल अवशेष जलाने से न केवल मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है, बल्कि वायुमंडल में हानिकारक गैसों का उत्सर्जन भी होता है. इससे आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिसका सीधा असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से ग्रसित लोगों पर पड़ता है. इसके साथ ही खेतों की मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे आने वाली फसलों की उत्पादकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. कृषि विभाग द्वारा फसल अवशेष जलाने पर रोक लगाने के लिए कई कदम उठाये गये हैं. नियमों के अनुसार, जो किसान अपने खेतों में पराली या अन्य फसल अवशेष जलाते हुए पाये जाते हैं, तो उनका किसान पंजीकरण रद्द कर दिया जाता है. इसके साथ ही वे सरकारी योजनाओं, अनुदान, बीज वितरण और फसल क्षतिपूर्ति जैसी सुविधाओं से भी वंचित हो जाते हैं.

विभाग का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से किसानों में डर पैदा होगा और वे वैकल्पिक तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे. हालांकि, किसानों की ओर से यह तर्क भी सामने आता रहा है कि फसल कटाई के बाद खेत को जल्दी खाली करने और अगली फसल की बोआई के लिए उनके पास समय और संसाधनों की कमी होती है. कई छोटे और सीमांत किसान आधुनिक कृषि यंत्रों जैसे हैप्पी सीडर, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम या मल्चर को किराये पर लेने में असमर्थ रहते हैं. ऐसे में वे मजबूरी में फसल अवशेष जलाने का रास्ता अपनाते हैं.

कृषि विभाग अनुदानित दर पर उपलब्ध करा रहा है कृषि यंत्र

सहायक कृषि यंत्रीकरण गरिमा ने बताया कि फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से किसानों की इस समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा अनुदान पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराने की योजनाएं चलायी जा रही हैं. इसके अलावा, पंचायत और प्रखंड स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाये जा रहे हैं, जिनमें किसानों को बताया जा रहा है कि फसल अवशेष को जलाने के बजाय उसे खेत में मिलाकर या चारे के रूप में उपयोग कर किस प्रकार लाभ उठाया जा सकता है. विभाग का दावा है कि कई किसानों ने इन तरीकों को अपनाया भी है, लेकिन संख्या अब भी संतोषजनक नहीं है.

निगरानी तंत्र के अभाव में बढ़ती जा रहीं घटनाएं

जिले में फसल अवशेष जलाने की बढ़ती घटनाएं यह भी संकेत देती हैं कि निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है. सैटेलाइट मॉनीटरिंग, ड्रोन सर्वे और स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भागीदारी से समय रहते घटनाओं की पहचान कर कार्रवाई की जा सकती है. इसके साथ ही किसानों को यह भी समझाना जरूरी है कि पर्यावरण संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी है. कुल मिलाकर, वर्ष 2020 से 2024 के बीच 3011 किसानों का पंजीकरण रद्द होना एक गंभीर चेतावनी है.

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Published by: Shailesh kumar

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