राजपुर. प्रखंड क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से आम लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. महंगाई का सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूर, किसान और कम आय वाले परिवारों पर पड़ रहा है. स्थानीय युवाओं का कहना है कि रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाले सामान के दाम बढ़ने से सीमित आमदनी में घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है.
ग्रामीणों के अनुसार पहले से ही बेरोजगारी और कम मजदूरी की समस्या झेल रहे परिवार अब महंगे राशन की वजह से अतिरिक्त आर्थिक दबाव में हैं. लोगों का कहना है कि यदि खाद्य पदार्थों की कीमतों में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो गरीब परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो जाएगा.
पीडीएस से जरूरी सामान हटने के बाद बढ़ी परेशानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि पीडीएस दुकानों से चीनी और केरोसिन जैसी आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बंद होने के बाद लोगों को इन सामानों के लिए खुले बाजार पर निर्भर होना पड़ रहा है. खुले बाजार में कीमत अधिक होने के कारण इसका सीधा असर परिवारों के मासिक बजट पर पड़ रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि सीमित मजदूरी में पहले ही भोजन, बच्चों की पढ़ाई और दूसरे जरूरी खर्च पूरे करना चुनौती बना हुआ है. ऐसे में राशन और खाद्य पदार्थों की कीमत बढ़ने से आर्थिक परेशानी और बढ़ गयी है. युवाओं ने प्रशासन से बाजार में कीमतों की निगरानी बढ़ाने और खाद्य पदार्थों की कालाबाजारी पर रोक लगाने की मांग की है.
युवाओं ने सरकार से की हस्तक्षेप की मांग
स्थानीय युवाओं का कहना है कि खाद्य पदार्थों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को नियमित बाजार जांच करनी चाहिए. उनका कहना है कि यदि समय रहते कीमतों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो गरीब परिवारों की स्थिति और खराब हो सकती है. क्षेत्र से रोजगार की तलाश में होने वाले पलायन पर भी महंगाई का असर पड़ने की आशंका जतायी गयी है.
युवाओं ने सरकार और स्थानीय प्रशासन से बाजार दरों को नियंत्रित करने के साथ जन वितरण प्रणाली को और मजबूत करने की मांग की है.
क्या कहते हैं क्षेत्र के युवा
कलीमुल्लाह ने कहा कि पिछले एक सप्ताह में राशन और खाद्य पदार्थों के दाम जिस तरह बढ़े हैं, उससे गरीब परिवारों की परेशानी काफी बढ़ गयी है. पीडीएस दुकानों से जरूरी सामान नहीं मिलने के कारण खुले बाजार से महंगी दरों पर खरीदारी करनी पड़ रही है. सरकार को जल्द कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाना चाहिए.
कृष्ण कुमार ने कहा कि गांवों में बड़ी संख्या दिहाड़ी मजदूरों की है. दिनभर मेहनत करने के बाद मिलने वाली सीमित मजदूरी से परिवार का खर्च चलाना पहले ही मुश्किल है. खाद्य पदार्थों की कीमत बढ़ने से गरीब और मध्यम वर्ग पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया है. सरकार को इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए.
