बक्सर: ब्रह्मपुर थाना बना निजी कंपनियों के विज्ञापन का केंद्र? सरकारी भवन पर लगे बड़े-बड़े ब्रांडिंग बोर्ड

बिहार के बक्सर जिले के ब्रह्मपुर थाना परिसर में निजी कंपनियों के विज्ञापन बोर्ड लगे होने का मामला सामने आया है. थाने की इमारतों और चारदीवारी पर लगे ये बोर्ड सरकारी संपत्ति के व्यावसायिक इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं. स्थानीय लोग इस पर स्पष्टता की मांग कर रहे हैं.

Buxar News: बिहार सरकार और पुलिस मुख्यालय की ओर से पुलिसिंग को पारदर्शी, निष्पक्ष और आधुनिक बनाने पर जोर दिया जाता है. वहीं, बक्सर जिले के ब्रह्मपुर थाना परिसर में निजी कंपनियों के विज्ञापन बोर्ड लगे होने का मामला सामने आया है. थाने की मुख्य इमारत, प्रवेश द्वार और चारदीवारी पर निजी सीमेंट और केबल कंपनियों की ब्रांडिंग दिखाई दे रही है.

थाना परिसर के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं. लोगों का कहना है कि सरकारी पुलिस भवन पर निजी कंपनियों के विज्ञापन किस अनुमति के तहत लगाए गए हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए.

थाने की इमारत और चारदीवारी पर निजी कंपनियों के बोर्ड

थाने के बाहर मुख्य बोर्ड से लेकर भवन की दूसरी मंजिल तक बड़े बोर्ड लगे हुए हैं. थाने के नाम और संपर्क नंबर के आसपास भी कंपनी के लोगो दिखाई दे रहे हैं. वहीं, थाने के मुख्य भवन के शीर्ष पर लगे साइनबोर्ड पर ब्रांड नेम और लोगो दिखाई दे रहा है.

सरकारी संदेशों के ऊपर निजी कंपनियों की ब्रांडिंग

थाने की चारदीवारी के निचले हिस्से में बिहार सरकार के अभियानों से जुड़े "जल-जीवन-हरियाली" और "एक कदम स्वच्छता की ओर" जैसे संदेश दिखाई देते हैं. इनके ऊपर निजी कंपनियों के कमर्शियल बोर्ड लगाए गए हैं. इस व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि सरकारी भवन पर इस तरह निजी कंपनियों की ब्रांडिंग किस प्रक्रिया के तहत की गयी है.

क्या मुख्यालय से ली गयी अनुमति?

थाना परिसर पर निजी कंपनियों के व्यावसायिक प्रचार को लेकर स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या इसके लिए पुलिस मुख्यालय या संबंधित उच्चाधिकारियों से अनुमति ली गयी है. हालांकि, इस संबंध में संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से कोई पक्ष इस खबर में उपलब्ध नहीं है. ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि निजी कंपनियों के विज्ञापन लगाने के लिए सरकारी भवन का इस्तेमाल किस आधार पर किया गया.

प्रायोजन के बदले क्या मिला?

स्थानीय लोगों के बीच इस बात को लेकर भी चर्चा है कि क्या थाने की रंग-रोगन, बोर्ड निर्माण या अन्य सुविधाओं के बदले निजी कंपनियों की ब्रांडिंग की गयी है. पुलिस विभाग की सरकारी संपत्ति पर व्यावसायिक प्रचार को लेकर लोग स्पष्टता की मांग कर रहे हैं.

स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि यदि किसी आम व्यक्ति द्वारा बिना अनुमति सरकारी दीवार पर विज्ञापन या पोस्टर लगाया जाता है, तो कार्रवाई की जाती है. ऐसे में सरकारी थाना भवन पर लगे निजी कंपनियों के बोर्ड को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए. अब देखना होगा कि मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन और वरीय पुलिस अधिकारी इस पर क्या संज्ञान लेते हैं और इन व्यावसायिक बोर्डों को लेकर क्या कार्रवाई की जाती है.



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By संतोष कांत

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