Buxar Girl National Wrestling Won Gold : सपनों को पूरा करने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती. मजबूत इरादे, लगातार मेहनत और खुद पर भरोसा हो तो गांव की गलियों से निकलकर भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है. बक्सर के राजपुर प्रखंड के तियरा गांव की बेटी और बिहार पुलिस की महिला कांस्टेबल पंचरत्ना कुमारी ने इसी जज्बे को अपनी सफलता की कहानी बना दिया है. पुलिस की ड्यूटी के साथ कुश्ती के अखाड़े में मेहनत जारी रखने वाली पंचरत्ना ने राष्ट्रीय कॉम्बैट कुश्ती प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर बिहार का नाम रोशन किया है.
मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित चमेली देवी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट में 21 से 23 अगस्त तक तीन दिवसीय राष्ट्रीय कॉम्बैट कुश्ती प्रतियोगिता आयोजित की गयी थी. प्रतियोगिता में देश के 18 राज्यों के पहलवानों ने हिस्सा लिया. बंगाल, हरियाणा, छत्तीसगढ़, गुजरात और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से पहुंचे खिलाड़ियों के बीच पंचरत्ना ने 72 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया.
गांव से खाकी तक और फिर अखाड़े में पहचान
पंचरत्ना का सफर किसी बड़े शहर या सुविधाओं से भरे माहौल से शुरू नहीं हुआ. राजपुर प्रखंड के तियरा गांव की साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने पहले अपनी मेहनत के दम पर बिहार पुलिस में जगह बनाई और खाकी वर्दी पहनी. इसके साथ ही कुश्ती के प्रति अपने जुनून को भी उन्होंने कमजोर नहीं पड़ने दिया.
पुलिस की जिम्मेदारियों के बीच खेल के लिए समय निकालना आसान नहीं था, लेकिन पंचरत्ना ने अपनी मेहनत और अनुशासन से दोनों जिम्मेदारियों को साथ लेकर चलने का रास्ता बनाया. यही लगन उन्हें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक लेकर गयी.
इंदौर में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों से आए अनुभवी पहलवानों का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद उन्होंने आत्मविश्वास नहीं खोया और अपने दांव-पेंच से प्रतिद्वंद्वियों को मात देते हुए 72 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया.
नेपाल में भी जीत चुकी हैं गोल्ड
पंचरत्ना की यह पहली बड़ी उपलब्धि नहीं है. इससे पहले नेपाल में आयोजित साउथ एशिया कॉम्बैट कुश्ती प्रतियोगिता में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था. आठ देशों की भागीदारी वाली उस प्रतियोगिता के 75 किलोग्राम भार वर्ग में पंचरत्ना ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया था.
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियों को मिलाकर यह उनका तीसरा गोल्ड मेडल है. लगातार बेहतर प्रदर्शन ने यह साबित किया है कि पंचरत्ना के लिए कुश्ती केवल खेल नहीं, बल्कि अपने सपनों को पूरा करने का जरिया भी है.
पंचरत्ना की जीत बनी गांव की बेटियों की उम्मीद
पंचरत्ना की सफलता की खास बात यह है कि उन्होंने सीमित संसाधनों वाली ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर यह मुकाम हासिल किया है. उनकी कहानी उन बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को सीमित कर लेती हैं.
पंचरत्ना ने दिखाया है कि अगर मेहनत करने का जज्बा और लक्ष्य हासिल करने का हौसला हो तो गांव की बेटियां भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सकती हैं. खाकी वर्दी में जिम्मेदारी निभाने के साथ अखाड़े में प्रतिद्वंद्वियों को चुनौती देना उनकी मेहनत और अनुशासन की मिसाल है.
गांव से पुलिस महकमे तक खुशी का माहौल
पंचरत्ना की स्वर्णिम सफलता की खबर तियरा गांव पहुंचते ही खुशी का माहौल बन गया. उनकी मां सरस्वती बौद्ध के साथ समाजसेवी सरोज साधु, भीमराम और गांव के अन्य लोगों ने उनकी उपलब्धि पर खुशी जतायी. पुलिस महकमे में भी पंचरत्ना की इस कामयाबी को लेकर उत्साह है.
तियरा गांव की गलियों से शुरू हुआ पंचरत्ना का सफर अब राष्ट्रीय मंच तक पहुंच चुका है. एक तरफ वह बिहार पुलिस की वर्दी में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं, तो दूसरी तरफ कुश्ती के अखाड़े में लगातार बिहार और देश का नाम रोशन कर रही हैं. उनका सफर यह संदेश देता है कि हालात चाहे जैसे हों, मजबूत हौसलों और लगातार मेहनत के दम पर सपनों को हकीकत में बदला जा सकता है.
