Buxar News : डुमरांव प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में धान की रोपनी का कार्य शुरू हो गया है. अब तक प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में लगभग 500 हेक्टेयर क्षेत्र, यानी करीब 5 प्रतिशत भूमि पर धान की रोपनी की जा चुकी है. हालांकि अधिकांश किसान अब भी पर्याप्त बारिश और सिंचाई के पानी का इंतजार कर रहे हैं. कृषि समन्वयक राजीव रंजन ने बताया कि सोवां, अरियांव, नुआंव, कंझरूआ, कोरानसराय, मठिला और कसियां सहित कई गांवों में धान की रोपनी धीमी गति से शुरू हुई है. जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है और जिनके धान के बिचड़े तैयार हैं, उन्होंने खेत तैयार कर रोपनी शुरू कर दी है.
पानी के अभाव में प्रभावित हो रही खेती
प्रखंड के अधिकांश क्षेत्रों में पानी की कमी के कारण धान की रोपनी का कार्य प्रभावित है. अंतिम छोर के किसानों का कहना है कि बारिश नहीं होने और नहरों में पर्याप्त पानी नहीं मिलने से उन्हें निजी ट्यूबवेल के सहारे खेती करनी पड़ रही है, जिससे लागत लगातार बढ़ रही है. कोरानसराय के किसान दयाशंकर तिवारी ने बताया कि कुछ दिन पहले नहर में पानी आया था. फिलहाल पानी कम हो गया है, लेकिन उपलब्ध पानी के सहारे किसान सीमित स्तर पर धान की रोपनी कर रहे हैं.
लो वोल्टेज से बढ़ी किसानों की परेशानी
करूअज गांव के किसान बीरेंद्र सिंह मौर्य, रविकांत उपाध्याय, मनोज ओझा, नंदजी सिंह, कन्हैया ओझा, चितरंजन चौबे और राजेंद्र चौबे ने बताया कि क्षेत्र में लो वोल्टेज की समस्या के कारण सिंचाई प्रभावित हो रही है. उनका कहना है कि कम वोल्टेज में मोटर पर्याप्त पानी नहीं दे पा रही है, जबकि वोल्टेज बढ़ने पर मोटर जलने का खतरा बना रहता है. किसानों का कहना है कि बेहतर खेती और समय पर धान की रोपनी के लिए पूरे क्षेत्र को अच्छी बारिश का इंतजार है. उनका मानना है कि यदि जल्द पर्याप्त वर्षा हुई तो बड़े पैमाने पर धान की रोपनी का कार्य गति पकड़ सकेगा.
Also Read : बिलौटी एनकाउंटर की न्यायिक जांच में तीसरे दिन दर्ज हुए बयान, मृतक के भाई ने कार्रवाई पर जताई नाराजगी
