बक्सर. जिले के सभी चारों विधानसभा सीट पर चुनावी समर में उतरे कुल 52 प्रत्याशियों में कुल 38 प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए. जिसमें मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी बसपा भी शामिल है. जबकि 2020 के विधानसभा चुनाव में बक्सर और राजपुर विधानसभा में बसपा की वोट ठीकठाक रहा. मगर इस चुनाव में बसपा को भी कार्यकर्ताओं ने पूरी तरह से खारिज कर दिया. वही जनसुराज पार्टी के प्रत्याशियों को भी मतदाताओं ने स्वीकार नहीं किया. जिस कारण जनसुराज के उम्मीदवारों को भी निराशा हाथ लगी. डुमरांव विधानसभा सीट से 2020 के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खड़े उम्मीदवार शिवांग विजय सिंह इस बार जनसूराज पार्टी के टिकट पर चुनावी अखाड़े में उतरे थे. मगर गत चुनाव से भी कम वोट पाये. यह चुनाव कई मायनों में इतिहास रचा, दो नये चेहरे बने विधायक ब्रह्मपुर. शुक्रवार की सुबह जब क्षितिज पर सूर्योदय हुआ तो वह अपने साथ कई जिज्ञासाओं को साथ लेकर निकला. लोगों के जेहन में कई सवाल थे. असमंजस की स्थिति थी. चुनाव में किसके हिस्से जीत जायेगी और किसके पाले में हार, यह जानने की बेचैनी थी. चुनाव प्रचार, मतदान के दिन के बाद बने या यूं कहें कि बनाये गये वातावरण को लेकर ऊहापोह की स्थिति में जिले के लोग कई रात करवटें बितायी. लेकिन जैसे-जैसे सूरज की किरण तेज होती गयी,स्थिति साफ होती चली गयी. यह चुनाव कई मायने में इतिहास रच गया. एक तरफ जहां इतिहास बदल दिया तो दूसरी ओर नई इबारत भी लिख डाली. जिला की एक ब्रह्मपुर सीट पर ही महागठबंधन को किसी तरह जीत हासिल हो सकी. बाकी के बक्सर, राजपुर व डुमरांव तीन सीट पर एनडीए ने कब्जा कर नया इतिहास रच दिया. राजनीतिक दल के साथ ही आमजन भी इसे बारीक नजर से देख रहे थे. राजनीतिक प्रेक्षक के साथ ही विपक्षी दलों के सामने यह सरकार की कामयाबी व असफलता की एक तरह से परीक्षा हो रही थी. खास कर महिला मतदाता ने इस पर अपनी मुहर लगा दी. प्राय सीटों पर मतदाताओं ने प्रत्याशी का चेहरा नहीं देखा, बल्कि उनके चिह्न को देखकर मतदान किय कारण रहा कि इस चुनाव में दो सीट पर उम्मीदवार पहली बार विधायक बने. इसमें बक्सर से आनंद मिश्रा व डुमरांव से राहुल सिंह को उम्मीदवार को जनता ने पहली बार विधानसभा पहुंचाया.
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