buxar news : जिले में लगायी गयीं 19695 सोलर स्ट्रीट लाइटें, फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में रात में छाया रहता है अंधेरा

buxar news : मेंटेनेंस नहीं होने से दम तोड़ रहीं लाइटें, शिकायत करने पर नहीं हो रही मरम्मतमरम्मत के नाम पर केवल फोटो लेने का काम कर रही एजेंसी, जिम्मेदारों का भी ध्यान नहीं

buxar news : बक्सर. जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आमजन को सुरक्षित व रोशन मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना के तहत हजारों सोलर स्ट्रीट लाइटें लगायी गयीं. लेकिन, योजना का हाल यह है कि शाम ढलते ही बड़ी संख्या में लाइटें बंद हो जा रही हैं.

मेंटेनेंस के नाम पर एजेंसी केवल जीपीएस फोटो खिंचवाकर कागजी खानापूर्ति कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बदतर बने हुए हैं. जिले में कुल 19,695 सोलर स्ट्रीट लाइटें तीन चरणों में लगायी गयी हैं. पहले चरण में वार्ड संख्या एक से चार तक 5,440, दूसरे चरण में वार्ड संख्या पांच से आठ तक तथा तीसरे चरण में शेष वार्डों में लाइटें लगाने का काम पूरा किया गया. वर्ष 2025 में जैसे ही स्थापना कार्य पूर्ण हुआ, वैसे ही बंद पड़ी लाइटों के मेंटेनेंस का मामला ठंडे बस्ते में चला गया. आश्चर्य की बात यह है कि सोलर स्ट्रीट लाइट की निगरानी के लिए जिले में सीएमएस सेंटर भी स्थापित है. इसके बावजूद बंद पड़ी लाइटों की मरम्मत नहीं हो रही है.

प्रभात खबर के टीम से बात करते हुए चुरामनपुर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि विवेक कुमार चतुर्वेदी, उमरपुर के चंद्रभूषण राय, जयप्रकाश राय ने बताया कि शिकायत करने के बाद एजेंसी के लोग आते हैं और जीपीएस फोटो खिंचवाकर चले जाते हैं. प्रभात खबर की टीम ने जब सोलर स्ट्रीट लाइट की वास्तविक स्थिति जानने के लिए शनिवार की रात विभिन्न पंचायतों का दौरा किया, तो जमीनी हकीकत सरकारी दावों से बिल्कुल उलट नजर आया. सबसे पहले रात 10 बजे टीम उमरपुर पंचायत के वार्ड संख्या दो में पहुंची. यहां पोल संख्या पांच और छह, वार्ड संख्या एक में पोल संख्या दो, वार्ड संख्या छह में पोल संख्या छह और 10 तथा वार्ड संख्या पांच में पोल संख्या नौ और दो की लाइटें बंद पायी गयीं. हैरानी की बात यह रही कि इन लाइटों का दो दिसंबर को मेंटेनेंस दिखाया गया था और विभाग को जीपीएस फोटो भी उपलब्ध करायी गयी थी. दिन में लाइटें चालू दिखाकर फोटो ले ली गयी, लेकिन रात होते ही स्थिति पहले जैसी ही रही. टीम ने जब इन स्थानों पर ध्यान से देखा, तो पाया कि कई लाइटों पर लाल बत्ती जल रही थी, जो तकनीकी खराबी या बैटरी/कंट्रोल यूनिट में समस्या की ओर इशारा करती है. इसके बावजूद एजेंसी द्वारा कोई ठोस मरम्मत नहीं की गयी.

इसके बाद रात 11 बजे टीम चुरामनपुर पंचायत पहुंची. यहां वार्ड संख्या 13, 10 और चार में अधिकांश सोलर स्ट्रीट लाइटें बंद मिलीं. ग्रामीणों ने बताया कि अंधेरा होने के कारण रात में आवागमन मुश्किल हो जाता है. वहीं महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ता है. रात 12 बजे टीम अर्जुनपुर पंचायत पहुंची. वार्ड संख्या 12 के उत्तर टोला में महावीर मंदिर के पास लगी सोलर स्ट्रीट लाइट पूरी तरह बंद मिली. स्थानीय लोगों का कहना था कि कई बार शिकायत के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ. इसके बाद 12:30 बजे टीम छोटका नुआंव पंचायत पहुंची. यहां स्थिति और भी चिंताजनक थी. ठोरा वार्ड संख्या एक में तीन लाइटें बंद, वार्ड संख्या दो में एक, पुलिया वार्ड संख्या तीन में दो, गोविंदपुर वार्ड संख्या चार और पांच में दो लाइटें बंद पायी गयीं. इसके अलावा अन्य वार्डों में भी कई लाइटें बंद थीं.

अधिकारियों का ध्यान नहीं, जनप्रतिनिधियों को चिंता नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि सोलर स्ट्रीट लाइट बंद रहने से रात के समय चोरी, दुर्घटना और असामाजिक गतिविधियों का खतरा बढ़ गया है. खेत-खलिहान और गांव की गलियों में अंधेरा छाया रहता है. योजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा, जबकि सरकार की ओर से इस पर करोड़ों रुपये खर्च किये गये हैं.

एजेंसी और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं. बंद पड़ी लाइटों पर न तो पंचायती राज विभाग के अधिकारी का ध्यान है, न एजेंसी का और न ही जनप्रतिनिधियों का. एजेंसी द्वारा केवल फोटो खींचकर काम पूरा दिखा देना गंभीर सवाल खड़ा करता है. सीएमएस सेंटर होने के बावजूद यदि खराब लाइटों की पहचान और मरम्मत नहीं हो रही है, तो निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है. इधर जिला पंचायती राज पदाधिकारी सचिन कुमार ने कहा कि जिले की सभी पंचायतों में लगायी गयीं सोलर स्ट्रीट लाइटों की जांच कर लेते हैं. जहां पर खराब है या बंद है, जो एजेंसी लगायी है उसे ही मेंटेनेंस करना है. नहीं करती है, तो विभागीय कार्रवाई की जायेगी.

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Published by: Shailesh kumar

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