Buxar Assembly : उमरपुर 60 के डेरा गांव में गंगा के कटाव से तबाही नहीं बन सका चुनावी मुद्दा

Buxar Assembly : गंगा नदी के गर्भ में समा चुके हैं अब तक 50 घर व कई एकड़ जमीन, 2018 से 2023 तक कटाव रोकने पर बिहार सरकार ने खर्च किये 4.29 करोड़ रुपये, 2025 में कटाव वाली भूमि बिहार में नहीं कहकर कार्यपालक अभियंता ने खड़ा कर दिया हाथ, अब न बिहार सरकार कर रही पहल और न ही उत्तर प्रदेश प्रशासन दे रहा ध्यान

Buxar Assembly : जिले के सदर प्रखंड के उमरपुर 60 के डेरा गांव में गंगा नदी का कटाव बिहार और उतर प्रदेश की सीमा के विवाद में फंस गया है. जबकि, इस साल भी 19 घर समेत कई एकड़ भूमि गंगा में समाहित हो गये.

इससे 19 परिवार घर विहीन हो गये व पलायन पर मजबूर हो गये. जबकि, बिहार सरकार द्वारा 2018 से लेकर 2023 तक कटाव रोकने के नाम पर चार करोड़ 29 लाख रुपये खर्च किये गये. लेकिन जब 2025 में कटाव शुरू हुआ, तो बिहार सरकार के अधिकारी कार्यपालक अभियंता बाढ़ नियंत्रण ने यह कहते हुए साफ हाथ खड़ा कर दिया कि कटाव हो रही वह भूमि बिहार में नहीं है. इसलिए हम कोई भी कटावरोधी उपाय नहीं कर सकते हैंं. ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते इसका कोई उपाय सरकार के द्वारा नहीं किया गया, तो बिहार सरकार द्वारा बनाया गया बक्सर-कोईलवर बांध भी बचाना मुश्किल हो जायेगा. सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह क्षेत्र बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा विवाद में ऐसा फंसा है कि न तो कोई राज्य प्रशासन इस समस्या को अपनी जिम्मेदारी मान रहा है और न ही कोई विभाग कटाव रोकने के लिए कदम उठा रहा है. जबकि उमरपुर 60 का डेरा गांव कोई नया इलाका नहीं है जहां कटाव हो रहा है. 2018 में बिहार सरकार ने यहां कटाव रोकने के लिए करोड़ों रुपये की योजना चलायी थी. गंगा तट पर बालू भरे बोरों और पत्थरों से बांधनुमा संरचना बनायी गयी थी. कुछ साल तक इसका असर भी दिखा, लेकिन इस बार जब 2025 में गंगा का प्रवाह बढ़ा, तो वह तटबंध टिक नहीं पाया. कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण विभाग से जब ग्रामीणों ने इस बार मदद की गुहार लगायी, तो उन्होंने साफ कह दिया कि जिस इलाके में कटाव हो रहा है, वह बिहार की सीमा में नहीं आता. जब तक राज्य सरकार सीमा स्पष्ट नहीं करती, हम वहां कोई काम नहीं कर सकते.

गंगा की बदलती धारा से खतरे में बक्सर-कोईलवर बांध

ग्रामीण विजय बहादुर राय का कहना है कि अगर समय रहते गंगा के इस कटाव को नहीं रोका गया, तो बिहार सरकार द्वारा बनाया गया बक्सर-कोईलवर बांध भी संकट में पड़ सकता है. नदी की धारा धीरे-धीरे उस दिशा में बढ़ रही है और कटाव का दायरा फैलता जा रहा है. गंगा की धारा जबसे इस ओर मुड़ी है, तबसे हर साल कई एकड़ जमीन खत्म हो रही है. अगर सरकार ने समय रहते पक्के तौर पर रोकथाम नहीं की, तो आने वाले दो-तीन साल में बांध भी खतरे में आ जायेगा. गांव में अब डर और निराशा का माहौल है. कई परिवार अपने बच्चों और सामान के साथ सुरक्षित जगहों पर पलायन कर चुके हैं. जो बचे हैं, वे हर रात डर के साये में सोते हैं कि कब गंगा की धारा उनके घरों तक पहुंच जाये. इसका डर हर साल रहता है. वहीं कई परिवार ऐसे परिवार हैं, जिसका कुछ सदस्य बिहार में है, तो कुछ सदस्य उतर प्रदेश में हैं. मगर जब कटाव होता है, तो न सहायता बिहार से मिलती है और न ही उत्तर प्रदेश से मिलती है. सीमा विवाद में कोई भी कटावरोधी कार्य नहीं हो रहा.

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Published by: Shailesh kumar

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