Buxar News : पिता को खोने के बाद नहीं मानी हार, डुमरांव के मनीष बने जीएसटी इंस्पेक्टर

Buxar News : कठिन परिस्थितियों के बावजूद डुमरांव के मनीष ने हासिल की सफलता, बने जीएसटी इंस्पेक्टर

Buxar News (सुजीत कुमार ओझा) : डुमरांव के एक साधारण किसान परिवार से आने वाले 23 वर्षीय मनीष कुमार ने कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए एसएससी सीजीएल 2025 परीक्षा में जीएसटी इंस्पेक्टर पद पर सफलता हासिल की है. सीमित संसाधनों और पारिवारिक संकटों के बीच मिली इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है. खास बात यह रही कि मनीष ने अपनी तैयारी डुमरांव में रहकर ही पूरी की और किसी बड़े शहर के कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया.

कोरोना काल में पिता का निधन, परिवार पर टूटा संकट

मनीष के पिता मनोज सिंह एक साधारण किसान थे. वर्ष 2021 में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान उनके निधन के बाद परिवार आर्थिक और मानसिक संकट में घिर गया. घर की जिम्मेदारी मां मीना देवी के कंधों पर आ गई. इसी दौरान मनीष की तबीयत भी लगातार खराब रहने लगी, जिससे पढ़ाई प्रभावित हुई। लगभग दो वर्षों तक संघर्षों के बीच परिवार ने कठिन समय बिताया.

जीविका समूह से जुड़ मां ने संभाली जिम्मेदारी

वर्ष 2023 में मनीष की मां मीना देवी ने जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़कर घर की आर्थिक स्थिति संभालनी शुरू की. छोटी-छोटी आमदनी से उन्होंने परिवार को सहारा दिया और बेटे की पढ़ाई जारी रखी. ऑनलाइन क्लास और पढ़ाई के जरूरी खर्च भी उन्होंने किसी तरह पूरे किए. मां के इसी त्याग और भरोसे ने मनीष को फिर से पढ़ाई के प्रति प्रेरित किया.

लगातार असफलताओं के बाद मिली सफलता

मनीष ने हार मानने के बजाय खुद को पूरी तरह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगा दिया. उन्होंने नेवी, एयरफोर्स, कोस्ट गार्ड, एसएससी, बैंकिंग, रेलवे, बिहार दारोगा, सीडीएस, एफकैट और इंटेलिजेंस ब्यूरो समेत कई परीक्षाओं में भाग लिया. कई परीक्षाओं में प्रारंभिक चरण पार किया और कुछ में इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो पाया. इसके बावजूद उन्होंने अपने प्रयास जारी रखे और आखिरकार एसएससी सीजीएल 2025 में जीएसटी इंस्पेक्टर पद हासिल कर लिया.

डुमरांव की लाइब्रेरी बनी तैयारी का आधार

मूल रूप से डुभकी गांव निवासी मनीष दो भाइयों में बड़े हैं. उनकी प्रारंभिक शिक्षा अरियांव हाई स्कूल से हुई. उन्होंने वर्ष 2017 में मैट्रिक और 2019 में इंटरमीडिएट परीक्षा में 76 प्रतिशत अंक प्राप्त किए. इसके बाद आरा के जैन कॉलेज से बीएससी मैथ ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की. आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने डुमरांव की लाइब्रेरी और ऑनलाइन संसाधनों के सहारे अपनी तैयारी जारी रखी.

परिवार और रिश्तेदारों का भी मिला सहयोग

मनीष की सफलता में उनके परिवार का भी अहम योगदान रहा. उनके चचेरे भाई दिनेश कुमार, जो सेना में कार्यरत हैं, और संजय कुमार, जो बिहार पुलिस में हैं, समय-समय पर आर्थिक और मानसिक सहयोग दिया. मनीष बताते हैं कि इन्हीं दोनों को देखकर उनके भीतर सरकारी सेवा में जाने की प्रेरणा पैदा हुई.

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Published by: YUVRAJ RATAN

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