Buxar News: (बक्सर से डॉ विष्णुदत्त द्विवेदी की रिपोर्ट) :
जिले के सिकरौल थाना क्षेत्र के जिगना गांव में हुए एक सनसनीखेज हत्या के मामले में मुख्य अभियुक्त इंदल राम ने चौतरफा पुलिसिया दबाव के आगे घुटने टेकते हुए बुधवार को बक्सर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) के न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया. कोर्ट में आत्मसमर्पण के पश्चात अभियुक्त की ओर से दाखिल किए गए जमानत के आवेदन पर न्यायाधीश द्वारा गहन सुनवाई की गई.
भाई ने बहन की हत्या का मामला दर्ज कराया था
मामले की गंभीरता और संगीन आरोपों को देखते हुए अदालत ने जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया और अभियुक्त को तुरंत न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का कड़ा आदेश जारी कर दिया. इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में नया भोजपुरी ओपी थाना क्षेत्र के चिल्हरी गांव के रहने वाले सूचक धर्मवीर राम ने विगत 30 अप्रैल को सिकरौल एसएचओ को एक लिखित आवेदन देकर अपनी बहन की हत्या का सनसनीखेज मामला दर्ज कराया था. सूचक धर्मवीर राम ने पुलिस को बताया था कि उनकी सगी बहन रीना देवी की शादी वर्ष 2019 में सिकरौल थाना के जिगना गांव निवासी इंदल राम के साथ पूरे रीति-रिवाज से संपन्न हुई थी.
ससुराल पक्ष ने मायके वालों को फोन कर दी थी जानकारी
घटना के दिन मृतका के ससुराल पक्ष के लोगों ने मायके वालों को फोन कर बेहद सामान्य लहजे में सूचना दी कि रीना देवी की अचानक मृत्यु हो गई है. जैसे ही यह दुखद और अप्रत्याशित सूचना मायके वालों को मिली, वे सभी भागे-भागे चिल्हरी गांव से लड़के के गांव जिगना पहुंचे. वहां पहुंचने पर मायके पक्ष के लोगों ने देखा कि ससुराल वाले मृतका के शव को आनन-फानन में छिपाने और साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से अंत्येष्टि (दाह संस्कार) के लिए श्मशान ले जा रहे थे.
मायके वालों ने संदेह होने पर बीच रास्ते में ही शव को रोक लिया और जब मृतका के शरीर को ध्यान से देखा, तो उसके गले पर किसी रस्सी या हाथ से गला दबाए जाने का गहरा और काला निशान बना हुआ था, जिससे साफ था कि उसकी बेरहमी से गला घोंटकर हत्या की गई थी. इस अमानवीय घटना के बाद पीड़ित पक्ष के लिखित बयान पर सिकरौल थाने में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस द्वारा वैज्ञानिक अनुसंधान शुरू किया गया था.
आरोपी का न्यायालय में सरेंडर
इस त्वरित अदालती घटनाक्रम के संबंध में सिकरौल एसएचओ अंकुश कुमार मंडल ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही अभियुक्त इंदल राम फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर सघन छापेमारी कर रही थीं. पुलिस द्वारा बनाए गए इसी कड़े कानूनी दबाव और दबिश के कारण आखिरकार अभियुक्त के पास कोई रास्ता नहीं बचा और उसने छिपने के बजाय न्यायालय में सरेंडर कर दिया, जिसके बाद उसे जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया है.
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