Buxar News(विनोद कुमार सिंह): धान की नर्सरी डालने का समय सिर पर है. कल 25 मई से रोहिणी नक्षत्र शुरू हो जाएगा, मगर सोन नहर और चौसा गंगा पम्प कैनाल में अब तक पानी नहीं छोड़ा गया है. ज्येष्ठ की भीषण गर्मी में क्षेत्र के सभी आहर, तालाब और नाले पूरी तरह सूख चुके हैं. सिवानों में कहीं पानी नहीं दिख रहा. पानी के अभाव में पशु-पक्षी तपती धूप में बेहाल हैं. सबसे ज्यादा परेशानी हिरणों को हो रही है, जो प्यास बुझाने के लिए बस्तियों की ओर आने लगे हैं. ग्रामीणों के अनुसार खेतों में दरारें पड़ गई हैं.
धान की नर्सरी को लेकर किसान चिंतित
किसान धान का बिचड़ा डालने को लेकर परेशान हैं. उनका कहना है कि एक सप्ताह के भीतर नर्सरी डालनी है, लेकिन सोन नहर का पानी चौसा सीवीसी कैनाल में नहीं पहुंचने से सिंचाई ठप है. रामपुर, डिहरी, पलियां, जलीलपुर, सिकरौल, सरेंजा, चुन्नी, पवनी व चौसा पंचायत के दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसान प्रभावित हैं.
जलस्रोत सूखे, पशुओं के सामने भी संकट
किसानों ने चेताया कि यदि जल्द पानी नहीं छोड़ा गया तो धान की खेती पिछड़ जाएगी और फसल चक्र बिगड़ जाएगा. उधर, जलस्रोत सूखने से पशुओं के लिए चारे और पानी का संकट गहरा गया है. ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग से तुरंत नहरों में पानी छोड़ने और पम्प कैनाल चालू करने की मांग की है. फिलहाल किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं और प्रशासन से राहत की उम्मीद कर रहे हैं.
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