Buxar News : सावन माह की आध्यात्मिक छटा के बीच नगर स्थित बाबा जंगलीनाथ महादेव मंदिर शुक्रवार को शिवभक्ति में सराबोर रहा. रुद्रसागर सेवा संस्थान की ओर से आयोजित सावन महोत्सव के तहत भव्य महारुद्राभिषेक कार्यक्रम हुआ. इसमें 51 हजार पार्थिव शिवलिंग की स्थापना की गयी और 251 श्रद्धालु दंपतियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का महारुद्राभिषेक किया. लगातार चौथे वर्ष आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में डुमरांव नगर समेत आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे.
11 विद्वान आचार्यों ने कराया वैदिक अनुष्ठान
महारुद्राभिषेक का संचालन आचार्य विंध्याचल ओझा के नेतृत्व में 11 विद्वान पंडितों ने कराया. वैदिक मंत्रोच्चार और रुद्रपाठ से मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया. अनुष्ठान में आचार्य संजीव मिश्रा, आचार्य रोहित ओझा, आचार्य शशि तिवारी, आचार्य शांतनु मिश्रा समेत अन्य विद्वान आचार्य शामिल रहे. श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ भगवान शिव की पूजा-अर्चना की.
छप्पन भोग और भंडारे में उमड़ी भीड़
महारुद्राभिषेक के बाद श्रद्धालुओं के लिए विशेष छप्पन भोग महाप्रसाद की व्यवस्था की गयी. इसके बाद आयोजित विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया. मंदिर परिसर में दिनभर महिला, पुरुष और बच्चों की भीड़ लगी रही. हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय बना रहा.
युवराज शिवांग विजय सिंह ने की पूजा-अर्चना
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डुमरांव राज परिवार के युवराज शिवांग विजय सिंह ने बाबा जंगलीनाथ महादेव की विधिवत पूजा-अर्चना की. उन्होंने भगवान शिव से प्रदेश और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की. कार्यक्रम में कार्यपालक पदाधिकारी राहुल धर दुबे, स्वच्छता पदाधिकारी राजीव रंजन, डॉ. विनोद प्रसाद समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे.
आयोजन की सफलता में संस्थान के सदस्यों का योगदान
महारुद्राभिषेक कार्यक्रम को सफल बनाने में रुद्रसागर सेवा संस्थान के सचिव रविशंकर चौबे, अध्यक्ष बालकृष्ण चौबे, संस्थापक सदस्य एवं सामाजिक कार्यकर्ता राजीव रंजन सिंह, व्यवस्थापक संजय चौबे, रिन्टू चौबे, पूर्व मुखिया तेज नारायण ओझा, सुभाष मिश्रा, सोनू सिंह, राजेश सैनी, कुंदन सिंह, अभिषेक तिवारी (मोनू), अजीत पांडेय, हिमांशु पाठक, वार्ड पार्षद प्रतिनिधि भुटेली सिंह और मदन चौबे समेत संस्थान के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. श्रद्धालुओं की भारी भागीदारी और भव्य आयोजन ने सावन महोत्सव को यादगार बना दिया.
