देश के विभिन्न हिस्सों में भेजी जाती है यहां की सब्जी
संवाददाता,डुमरांव
दियरांचल इलाके के किसानों ने सब्जियों की खेती कर क्षेत्र में एक मिसाल कायम की है. जिन्हें यह विश्वास न हो कि कुछ नया करने से तकदीर बन सकती है. वह इस क्षेत्र के किसानों को देख कर अपनी राय बदल लेंगे. इन्होंने सब्जियों की खेती कर अपनी आर्थिक तकदीर बदल डाली है. दियारे के युवा व बुजुर्ग अपने दम पर खेती कर पारिवारिक स्थिति संभाली है. दियारे के कई गांवों के युवा परदेश से नौकरी छोड़ गांव में सब्जी की खेती से जुड़ गये हैं. एनएच 84 की सड़कों पर कई जगह सब्जी की मंडियां लगती है. जहां पर अन्य प्रदेशों के व्यापारी पहुंच कर खरीदारी करते हैं. अहले सुबह से ही इन सड़कों पर सब्जी की ढुलाई को लेकर वाहनों के काफिले लग जाते हैं.
वर्ष भर होती है खेती
दियरांचल का इलाका गेहूं उत्पादन के लिए जाना जाता था. लेकिन गेहूं के उत्पादन में किसानों को उतना लाभ नहीं मिल पाता था जितनी खेती में उनकी लागत आती थी. दियारे के कई गांवों के किसानों ने पांच वर्ष पहले धीरे-धीरे सब्जी की शुरुआत की और मुनाफे का अंदाजा लगाया. आर्थिक लाभ मिलते ही सब्जी की खेती दियारे के गांवों के लिए वरदान साबित हो गया. अब किसान वर्ष भर टमाटर, गोभी, प्याज, लौकी, मूली, हरी मिर्च, परवल, धनिया, लहसुन, नेनुआं, भिंडी आदि उपजाते हैं.
एनएच 84 पर लगती हैं मंडियां
एनएच 84 के मुख्य सड़क पर चिलहरी, पुराना व नया भोजपुर, धरहरा, कृष्णाब्रम्ह, बिहिया चौरस्ता सहित अन्य जगहों पर सब्जी की खरीदारी को लेकर जमघट लगता है. इन मंडियों में दियारे को पहुंचे कई किसानों ने बताया कि सिंचाई की कमी एवं रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते दाम से किसान सब्जी की खेती करने पर मजबूर हुए है. आज लगन व मेहनत के बदौलत सब कुछ मिला है. दियारे के जवही, नैनीजोर, महुआर, धनंजयपुर, लक्ष्मणपुर, नियाजीपुर, धरहरा चक्की के इलाकों में बड़े पैमाने पर सब्जी की उपज होती है.
अन्य प्रदेशों में जाती है सब्जी
दियारे के किसानों ने बताया कि स्थानीय बाजार नहीं होने के कारण यहां की उपजी सब्जी, उत्तरप्रदेश के गोरखपुर, गाजीपुर, वाराणसी, बलिया, बस्ती, कानपुर, झारखंड के रांची, टाटा, बोकारो सहित प्रदेश के पटना, सासाराम, हाजीपुर, वैशाली के अलावा स्थानीय छोटी मंडियों में पहुंचती है. किसानों की माने तो अन्य प्रदेशों से आये व्यापारी नगदी खरीद करते हैं. दियारे से प्रतिदिन 25 से 30 ट्रक सब्जियां बिहार के अलावा अन्य प्रदेशों में भेजी जाती है.
क्या कहते हैं किसान
सब्जी के पैदावार में शामिल किसान अगलू चौधरी, शिवजी, सुनील चौधरी, शिव मोहन, चंद्रभान मिश्र आदि का कहना है कि सब्जी की खेती से प्रतिवर्ष तीन से चार लाख रुपये की बचत होती है. खेती को लेकर परिवार छोड़ कर अन्य प्रदेशों में नौकरी कर रहे युवा भी घर आकर खेती में जुट गये हैं. प्रदेश से लौटे बिन डेरा, मकुनपुर, सिमरी व धनंजयपुर के सुनील, रामचंद्र, भिखारी, जदू राय सहित दर्जनों युवक अपनी मेहनत के बदौलत तकदीर लिख रहे हैं.
