बक्सर. नगर के किला मैदान में शनिवार को आयोजित शाहाबाद महोत्सव में भोजपुरी गीतों पर न सिर्फ दर्शक झूमते रहे, बल्कि भोजपुरी के रंगों से महोत्सव पूरी तरह सराबोर हो गया. जैसे-जैसे रात चढ़ रही थी, वैसे-वैसे महोत्सव भोजपुरी के रंगों में रंगता जा रहा था. दर्शकों का उत्साह सातवें आसमान पर था. मध्य रात्रि के बाद स्थिति ऐसी हुई कि मंच व दर्शकों की दूरी सिमट कर रह गयी. दर्शकों की भीड़ ने मंच व वीआइपी गैलेरी पर कब्जा जमा लिया. मध्य रात्रि के बाद कार्यक्रम स्थल पर अव्यवस्था की स्थिति हो गयी. स्थिति ऐसी हुई कि मुंबईया चकाचौंध के बीच भोजपुरी सम्राट भरत शर्मा भी गुम हो गये. शाहाबाद महोत्सव में भोजपुरी सम्राट भरत शर्मा की एक भी प्रस्तुति श्रोता नहीं सुन पाये. कार्यक्रम की शुरुआत प्रियवंदा तिवारी ने बाली रे उमरिया..से की. वहीं मंटू उपाध्याय ने सिंह सवारी मईया, मंदिर में आयी.. गीत से दर्शकों से खूब तालियां बटोरी. अरविंद अकेला उर्फ कल्लू एवं भोजपुरी चर्चित अभिनेता दिनेश लाल यादव निरहुआ के मंच पर आते ही दर्शकों का हाथ हिला कर अभिवादन किया तथा अपने गीतों से खूब वाहवाही बटोरी. भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता मनोज तिवारी मृदुल ने श्रोताओं को अपनी गीतों से खूब झुमाया. पाश्र्व गायिका इंदु सोनाली की जबसे लड़ल बा अंखियां पर दर्शकों की तालियां गूंजती रही. इसके अलावा बाला जी विनायक, गुड्डू तिवारी, गोलू गोसाई, संतोष यादव, पियुष परदेशी, श्वेता तिवारी समेत दर्जनों गायकों ने अपने गीतों से दर्शकों को रात भर खूब झुमाया. शाहाबाद महोत्सव में किला मैदान खचाखच भरा हुआ था. महोत्सव में भोजपुरी को आगे बढ़ाने के लिए वक्ताओं ने अपने विचार रखे. वहीं कार्यक्रम भोजपुरी के पारंपारिक नृत्य जटिल की प्रस्तुति आरा की टीम ने की. लोक कलाकार भिखारी ठाकुर के टीम केरामज्ञा राम ने गंगा जी के गीतों को गा कर भिखारी ठाकुर की याद को ताजा कर दिया. समारोह का संचालन चर्चित उद्घोषक रविरंजन व गुप्तेश्वर पांडेय ने संयुक्त रूप से किया. मौके पर विधान पार्षद हुलास पांडेय, विधायक राजेश्वर राज, एडीएम अजय कुमार, डीएसपी डॉ मो. शिब्ली नोमानी, राजेश तिवारी, विशेश्वर ओझा सहित अन्य उपस्थित थे.
भोजपुरी के रंग में सराबोर रहा शाहाबाद महोत्सव
बक्सर. नगर के किला मैदान में शनिवार को आयोजित शाहाबाद महोत्सव में भोजपुरी गीतों पर न सिर्फ दर्शक झूमते रहे, बल्कि भोजपुरी के रंगों से महोत्सव पूरी तरह सराबोर हो गया. जैसे-जैसे रात चढ़ रही थी, वैसे-वैसे महोत्सव भोजपुरी के रंगों में रंगता जा रहा था. दर्शकों का उत्साह सातवें आसमान पर था. मध्य रात्रि […]
