गुड़ की खुशबू से महक रहा डुमरांव
डुमरांव़ : डुमरांव व आसपास के इलाके की आबो हवा गन्ना की खेती के लिए अच्छी है़ इलाके के किसानों के आंगन में गुड़ के कराह चढ़ गये हैं. गुड़ की सोधी महक से इलाका महक रहा है. किसानों की कड़ी मेहनत व परिजनों की लगन से परिवार का भरण-पोषण आसानी से होता है़ इस […]
डुमरांव़ : डुमरांव व आसपास के इलाके की आबो हवा गन्ना की खेती के लिए अच्छी है़ इलाके के किसानों के आंगन में गुड़ के कराह चढ़ गये हैं. गुड़ की सोधी महक से इलाका महक रहा है. किसानों की कड़ी मेहनत व परिजनों की लगन से परिवार का भरण-पोषण आसानी से होता है़ इस इलाके में हजारों एकड़ गन्ना की पैदावार होता है,
लेकिन इलाके में चीनी मिल नहीं रहने के बावजूद किसानों की लगन से गन्ने की खेती में चमक आयी है़ हालांकि अपनी उपज को खपाने को लेकर चिंतित किसान काफी मशक्कत के बाद गुड़ बनाने के कामों को तवज्जों दी है. यहां के गुड़ के मिठास से कई प्रदेशों की मंडियां कायल हैं.
गुड़ ने दिलाई प्रसिद्वी : अनुमंडल के नंदन, लाखन डीहरा, अरियाव, आमसारी, शिवपुर, केसठ आदि इलाके के सोधी गुड़ की मिठास से कई प्रदेशों के लोग मुरीद हैं. यहां के बने गुड़ ने काफी प्रसिद्वी दिलाई है़ स्थानीय किसान अपने खेतों से गन्ने को काट कर घर लाते हैं और घरों के बने गुड़ को आसपास की मंडियों में ले जाकर बिक्री करते हैं.
यहां से गुड़ उत्तर प्रदेश के बलियां, गाजीपुर, बनारस, गोरखपुर व झारखंड के बोकारो जमशेदपुर के व्यपारी गुड़ों को खरीदारी कर अपनी मंडियों में बेच अच्छी लाभ अर्जित करते हैं.
मोटे लाभ से बंचित हैं किसान : बक्सर, आरा, भभुआ, रोहतास सहित दो सौ किलो मीटर के दायरे में एक भी चीनी मिल नही है, जिससे किसानों को मोटे लाभ से वंचित रहना पड़ रहा है़ पटना प्रमंडल के बिहटा में एक चीनी मिल था, वह भी दशकों से बंद है़ ऐसे में किसान अपनी उपज के खपत को लेकर चिंतित है़ं
सहायता के बगैर किसान बेदम : उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार नये-नये कृषि यंत्रों को मुहैया करा रही है, लेकिन गन्ने की खेती करनेवाले किसानों को सरकारी सहायता के नाम पर एक तील भी मदद नहीं मिल पायी है़ इन किसानों को पानी का अभाव काफी खटकता है़ गन्ने की पैदावार के लिए आसमानी पानी पर निर्भर रहना पड़ता है़