डुमरांव़ : ऐतिहासिक छठिया पोखरा घाट पर नवयुवक सुरक्षा समिति द्वारा छह घोड़े पर सवार भगवान भास्कर की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में कारीगर कृष्णा मुरारी, गोपीचंद, किस्मत लगे हुए हैं. विदित हो कि सन 1970 से पोखर के समीप भगवान भास्कर की प्रतिमा स्थापित हो रही है.
प्रतिमा को छठव्रती पहला अर्घ देेने के साथ सूर्य देव का दर्शन करते हैं. छठिया पोखरा स्थित प्राचीन शिव मंदिर के आसपास छठ को लेकर व्रती के साथ महिला व पुरुषों का सैलाब उमड़ता है़ घाटों पर पहुंचते ही व्रतियों द्वारा घाट पूजन के बाद शिव मंदिर में द्वीप दान करने की परंपरा आज भी कायम है़
इसको लेकर बाल पंचवटी कला निकेतन के द्वारा शिव मंदिर के रंग-रोगन एवं सजावट आकर्षण ढंग से कराया जाता है़ पोखर के चारों समिति के द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों में सड़क पर रंग-बिरंगी रोशनी से बेहतर ढंग से सजाया जाता है़ समिति के लोगों ने बताया कि इस बार मुख्य द्वार सूर्यनुमा होगा. जबकि आकर्षक पंडाल में भगवान भास्कर विराजमान रहेंगे.
