बक्सर : जिले के कई गांवों में गरमी के कारण जल स्तर दो मीटर तक नीचे चला गया है. कई चापाकल सूख गये हैं. कई चापाकल वर्षो से खराब भी हैं, जिनका मेंटेनेंस अब तक नहीं हुआ है.ऐसे में चापाकलों की खराब स्थिति के कारण लोगों को पेयजल के लिए परेशान होना पड़ रहा है. बावजूद इसके विभागीय स्तर पर इन्हें ठीक करने का काम नहीं चल रहा है. कई प्रखंडों में बने पानी टंकी भी बंद हो गये हैं.
यहीं हाल बक्सर व डुमरांव के शहरी क्षेत्र में भी है. कई वार्डो में लगे चापाकल महज एक ही साल में सूख गये या फिर खराब हो गये हैं. इन जगहों पर फिर चापाकल नहीं लगा है. खराब चापाकलों का मेंटेनेंस भी समय से नहीं होता. नप और पीएचइडी के पेंच में पड़ कर इनका मेंटेनेंस कार्य रूक गया है. हालांकि पीएचइडी खराब चापाकलों का मेंटेनेंस समय पर करने का दावा भी करता है.
पेयजल की स्थिति : बक्सर शहर में कुल 122 चापाकल लगाने हैं. इनमें से कुछ जगहों पर कार्य चल भी रहा है. पूर्व से करीब 100 चापाकल लगे हुए हैं, जिसमें से करीब 10 से अधिक चापाकल विभिन्न जगहों पर खराब हैं. इनमें हनुमान फाटक, कोइरपुरवा, स्टेशन परिसर समेत अन्य जगह शामिल हैं. इन चापाकलों का मेंटेनेंस कार्य अब तक नहीं होने से लोगों को पेयजल के लिए भटकना पड़ता है. सबसे ज्यादा परेशानी राहगीरों को होती है.
ब्रह्मपुर में पानी टंकी से नहीं निकल रहा जल : डुमरांव अनुमंडल के ब्रह्मपुर प्रखंड में बनाया गया पानी टंकी अब तक चालू नहीं हुआ. लाखों की लागत से वर्ष 2010 में इसे बनाया गया था. पाइप लाइन भी बिछायी गयी थी, लेकिन आपूर्ति शुरू होते ही कहीं से लिकेज करने लगा. इसके बाद से ही बंद कर दिया गया और फिर चालू नहीं हुआ. क्षेत्र में कई चापाकल खराब स्थित में हैं, जिनका मेंटेनेंस कार्य भी नहीं हुआ है. ऐसे में लोगों को पेयजल के लिए परेशान होना पड़ता है.
केसठ में नहीं है जलमीनार : केसठ गांव में जलमीनार नहीं है, बल्कि एक मिनी जल नलकूप है. वह भी करीब डेढ़ वर्ष से खराब है, जिसके कारण लोगों को परेशान होना पड़ रहा है. इस पंचायत में दर्जनों चापाकल खराब हैं, जिनका मेंटनेंस अब तक नहीं हो पाया है. लोग बताते हैं कि यहां चापाकल लगा भी दिया जाता है, तो मेंटनेंस कार्य नहीं होता. ऐसे में मामूली खराब चापाकल भी लंबे समय के लिए बेकार पड़े हैं.
बिजली के अभाव में पानी टंकी बंद
नावानगर में एक पानी टंकी है. बिजली के अभाव में टंकी बंद है. क्षेत्र में लगे चापाकल भी खराब स्थित में हैं, जिसके कारण पेयजल की समस्या बनी रहती है. संभ्रांत लोग तो चापाकल लगा लिये हैं, लेकिन, गांव का गरीब तबका पेयजल के लिए इधर-उधर भटकता रहता है. पिछले एक साल से कोई मेंटनेंस कार्य नहीं हुआ है, जिसके कारण सभी चापाकल बेकार पड़े हैं.
यहीं हाल अन्य प्रखंडों व पंचायतों की है. जहां पेयजल के लिए लोग परेशान हैं, लेकिन विभाग की ओर से कोई विशेष पहल नहीं की जा रही है. ऐसे में पेयजल इन जगहों के लिए प्रमुख मुद्दा बना हुआ है. बहरहाल, लोग जैसे-तैसे गरमी में पेयजल की समस्या से निजात पाने की कोशिश कर रहे हैं.
प्रति व्यक्ति 40 लीटर पानी की है जरूरत : जिले में प्रति व्यक्ति 40 लीटर पानी की आवश्यकता है. सरकारी सर्वे के अनुसार इसके लिए 250 व्यक्ति की आबादी पर एक चापाकल लगाने का निर्देश है, लेकिन जिले में कई योजनाओं से मात्र सौ की आबादी पर ही एक चापाकल लगाया गया है. सबसे बड़ी बात है कि इनका समय पर मेंटनेंस नहीं होना, जिसके कारण परेशानी बनी रहती है.
हर पंचायत में 70 से 80 चापाकल लगे हैं : पीएचइडी के कार्यपालक अभियंता अनिल कुमार ने बताया कि हर पंचायत में 70-80 चापाकल लगे हैं. इस साल भी हर पंचायत में सात चापाकल लगेंगे.जहां गड़बड़ी की शिकायत मिलती है, वहां मेंटनेंस कराया जाता है.
यहां कर सकते हैं शिकायत : यदि आपके गांव में कोई चापाकल खराब है, तो बनवाने के लिए उसे विभाग के 222510 या मोबाइल नंबर 9431643614 पर कॉल कर शिकायत कर सकते हैं.
