जमीन तो मिल गयी, पर नहीं बन सका पक्का घर

शांति नगर के लोग बिजली, इंदिरा आवास जैसी सुविधाओं हैं वंचित बक्सर : 1991 में बक्सर जिले का स्थापना हुआ. जिले के प्रथम डीएम के रूप में दीपक कुमार ने कार्यभार संभाला. दीपक कुमार ने दशकों से जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मुफलीसी की जिंदगी जीनेवाले और नाला और आहरों के किनारे झोंपड़ी […]

शांति नगर के लोग बिजली, इंदिरा आवास जैसी सुविधाओं हैं वंचित
बक्सर : 1991 में बक्सर जिले का स्थापना हुआ. जिले के प्रथम डीएम के रूप में दीपक कुमार ने कार्यभार संभाला. दीपक कुमार ने दशकों से जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मुफलीसी की जिंदगी जीनेवाले और नाला और आहरों के किनारे झोंपड़ी लगा कर रहनेवाले लोगों को बुला कर मुख्यालय में जगह दी और शांति नगर नाम से एक बस्ती बसा दी
मुख्यालय को सबसे पहले अतिक्रमण मुक्त करने की पहल उसी दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी ने शुरू की. नगर के बीचोबीच ऐतिहासिक किले पर आशियाना बनाये लोगों को शांति नगर की स्थापना कर 11 नंबर लख के पास बड़ी नहर के किनारे बसाया गया, यह नगर वर्तमान में वार्ड नं. 34 का अभिन्न अंग है. शांति नगर की आबादी 12 सौ से ज्यादा है.
कितने घर हैं शांतिनगर में : सरकार शांति नगर को व्यवस्थित बसाने की पहल की थी. उसी पहल के तहत सभी लोगों को माप कर तीन-तीन डिसमिल भूमि जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध करायी गयी है. शांति नगर में करीब छह सौ घरों के लोग रहते हैं.
नहीं है बिजली की व्यवस्था : जिला प्रशासन शांति नगर तो बसाया, पर लोगों को मूलभूत सुविधाओं से आज तक महफूज ही रखा है. लोगों द्वारा बिजली की सुविधा पाने के लिए दूर से बांसों के सहारे तार खींचा गया है, जो हमेशा किसी अनहोनी को न्योता देता है.
पेयजल की नहीं है समुचित व्यवस्था
पेयजल की भी समुचित व्यवस्था नहीं है. इतनी बड़ी आबादी पर महज दो-चार चापाकल ही सुचारु ढंग से कार्य कर रहे हैं. लोग अपनी जरूरतों को बड़ी कठिनाई से पूरा कर रहे हैं.
कैसा है आशियाना : शांति नगर के लोगों को जिला प्रशासन द्वारा बसाये गये लगभग 24 वर्ष हो गये हैं. उनका आशियाना आज भी मिट्टी का बना घर एवं झोंपड़ी ही है. अभी तक सरकारी स्तर पर एक पक्का घर तक नसीब नहीं हो सका है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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