डुमरांव : आज के दौर में सब कुछ तेजी से बदल रहा है. शादियों के मौसम में वर-व-वधू द्वारा मिले निमंत्रण पत्र से ही लोग दावत की भव्यता भाप ले रहे हैं. लगन के दिनों में बाजारों में आये बेहद आकर्षक और फैशनेबल शादी कार्ड की दुकानों पर मांग जोरों पर है. दो माह के लगन में स्थानीय बाजार के कारोबारियों ने 25 लाख का कारोबार किया है. आधुनिकता के युग में तेजी से शादी के कार्डो पर फैशन हावी हुआ है.
पुरानी परंपरा हो गयी लुप्त : तीन दशक पूर्व दूर के रिश्तेदारों को हल्दी लगा निमंत्रण पत्र भेजा जाता था.पास-पड़ोस के लोगों को पन्ने पर लिख कर हल्दी लगा संदेश ही काफी था. अब बदलते दौर में सब कुछ गायब हो गया है. आज वहीं पुरानी परंपरा को फैशन पसंद लोग नये कलेवर में पसंद कर रहे हैं. महंगे शादी कार्डो पर अगर गौर करें, तो आपको पुरानी परंपरावाले संदेश पत्र की झलक मिलेगी.
कई प्रदेशों से आते हैं कार्ड : शादी कार्ड व्यवसायी दीपक जायसवाल, अजरुन कुमार, अजय कुमार, जगदीश प्रसाद, शशि शेखर, कमलेश राय, अजय वर्मा आदि बताते हैं कि दुकानों पर आम से खास तक के लोगों के लिए कार्ड उपलब्ध है. वैसे, तो अधिकतर शादी कार्ड बनारस व दिल्ली से मंगाये जाते हैं, लेकिन हाइ क्लास के लोगों में लखनऊ की कार्डो की मांग ज्यादा है.
पारंपरिक कलेवर का असली लुक लखनऊ कार्ड में ही मिलता है. शहर के व्यवसायी अजय कुमार, जगदीश प्रसाद शशि शेखर आदि ने लगन शुरू होने के दो माह लगभग 25 लाख रुपये का कारोबार हुआ है. अनुमंडल क्षेत्र के लोग अब शादी-विवाह के अतिरिक्त बच्चे का मुंडन संस्कार, जनेऊ, गृह प्रवेश आदि अवसर पर भी कार्ड छपवा रहे हैं.
देवताओं को भी निमंत्रण : लड़का व लड़की घर में किसी की शादी होती है, आज भी पहला कार्ड कुल देवी या देवताओं को चढ़ाया जाता है़ पंडित प्रभु नारायण पांडेय कहते हैं कि हम चाहे नये युग में हो, लेकिन परंपरा और आदर्श हमेशा हमें मार्ग दिखाते है़ं
