24 घंटों में 16 घंटे बंद रहता है फाटक

इटाढ़ी रेलवे गुमटी पर हर दिन जाम में फंसते हैं हजारों वाहन बक्सर शहर के पूवी क्षेत्र में इटाढ़ी गुमटी है, जो शहर के कई प्रखंडों को जोड़ती है. गाड़ियों के कारण गुमटी अमूमन बंद होती है और गाड़ियों का इंजन चालू रहता है. जिससे पेट्रोल-डीजल की बरबादी होती है. एक अनुमान के मुताबिक यह […]

इटाढ़ी रेलवे गुमटी पर हर दिन जाम में फंसते हैं हजारों वाहन
बक्सर शहर के पूवी क्षेत्र में इटाढ़ी गुमटी है, जो शहर के कई प्रखंडों को जोड़ती है. गाड़ियों के कारण गुमटी अमूमन बंद होती है और गाड़ियों का इंजन चालू रहता है. जिससे पेट्रोल-डीजल की बरबादी होती है. एक अनुमान के मुताबिक यह बरबादी प्रतिमाह दो हजार लीटर तक होती है, जिसका बाजार मूल्य डेढ़ लाख रुपये के लगभग है. जागरूकता के अभाव में लोग गाड़ियां बंद नहीं करते, जिससे लोगों को आर्थिक नुकसान तो होता ही है, पर्यावरण में प्रदूषण भी फैलता है.
हर माह करीब दो हजार लीटर पेट्रोल-डीजल की होती है बरबादी
एक ट्रेन के पार होने में आठ मिनट तक बंद रहता है फाटक
तीन घंटे में पांच हजार वाहनों का होता है आवागमन
बक्सर : स्थानीय रेलवे स्टेशन के पूर्व में स्थित इटाढ़ी गुमटी पर हर दिन घंटों जाम लगने के कारण यात्रियों को हर दिन परेशानी होती है, साथ ही प्राकृतिक संसाधन क्षति व प्रदूषण का सामना भी करना पड़ता है. दरअसल इटाढ़ी रेलवे गुमटी से हर रोज लगभग पांच हजार बड़ी-छोटी गाड़ियां गुजरती हैं. इस गुमटी से इटाढ़ी प्रखंड, राजपुर प्रखंड, डुमरांव प्रखंड व नावानगर प्रखंड को लोग गुजरते हैं, जबकि रोहतास जिले के दिनारा क्षेत्र को भी मिलाती है यह गुमटी.
रेलवे मेन मार्ग होने से हर दिन इस रूट से 80 से ज्यादा ट्रेनें गुजरती हैं. ट्रेन के आवागमन के कारण एक दिन में लगभग 160 बार से अधिक रेलवे गुमटी का फाटक बंद किया जाता है, जिससे पैदल व वाहन चालकों के लिए एक बड़ी परेशानी का सबब है.
हर दिन इस मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों के मन में जाम लगने की बात सताती है. यात्रियों ने बताया कि बक्सर से इटाढ़ी जाने में यह रेलवे गुमटी लक्ष्मणरेखा की तरह मानी जाती है. यात्री जब इटाढ़ी गुमटी को पार कर लेते हैं , तो मानों जैसे इटाढ़ी जाने की आधी दूरी तय कर ली हो. पैदल यात्रियों को भी काफी परेशानी ङोलनी पड़ती है. हालांकि, पैदल यात्रियों के लिए ओवरब्रिज निर्माण की स्वीकृति की बात कही जा रही है.
16 घंटों तक फाटक रहता है बंद : हर रोज लगभग 84 ट्रेनें रोजाना इटाढ़ी गुमटी से गुजरती हैं जो बक्सर स्टेशन पर ठहराव है. इसके अलावा 40 के करीब ऐसी ट्रेनें हैं , जो नॉन स्टॉपेज हैं, जिसमें मालगाड़ियां भी शामिल हैं. इस पूरे प्रकरण पर गौर किया जाये, तो पायेंगे कि सिर्फ 84 ट्रेनों के आवागमन पर 160 बार फाटक बंद रहता है. इस तरह एक दिन में इटाढ़ी गुमटी मात्र तीन घंटे ही खुलती है. शेष 21 घंटे ट्रेनों के आवागमन के दौरान बंद ही रहती है. एक ट्रेन जब गुमटी को जब पार करती है, तब आठ मिनट तक गुमटी का फाटक बंद रहता है.
दो हजार लीटर ईंधन हर माह होता है बरबाद : इटाढ़ी गुमटी से हर रोज पांच हजार छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं. मिली जानकारी के मुताबिक मुगलसराय की ओर जाने के क्रम में ट्रेन जब वरुणा पहुंचती है तब इटाढ़ी गुमटी को बंद कर दिया जाता है. जबकि, वरुणा से इटाढ़ी गुमटी को पार करने में ट्रेन को लगभग आठ मिनट का समय लगता है. ऐसे में एक ट्रेन को पार कराने में गुमटी आठ मिनट तक बंद रहती है.
इस तरह दिन भर में 120 बार ट्रेनें पार करती हैं, जिसमें 160 घंटे गुमटी बंद रहती है. रोजाना पांच हजार वाहनों के आवागमन के कारण हर दिन 50 हजार रुपये का पेट्रोल की बरबादी होती है या यूं कहें कि माह में दो हजार लीटर ईंधन गुमटी के जाम में फंस कर बरबाद हो जाती है. औसतन 10 रुपये के मूल्य का ईंधन 8 मिनट चालू हालत में खड़ी वाहन से बरबादी होती है. इस तरह कुल 5 हजार वाहनों से हर दिन 50 हजार रुपये का ईंधन बरबाद हो जाता है.
प्रदूषण से लोग रहते हैं परेशान : हर रोज फाटक के बंद रहने के क्रम में वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण से पैदल यात्री समेत आसपास के दुकानदारों को काफी परेशानी होती है.
दुकानों के आसपास वाहनों से निकलने वाले धुएं से वातावरण दूषित रहता है. इटाढ़ी गुमटी के समीप स्कूल, कॉलेजों की अच्छी -खासी संख्या है. इटाढ़ी रोड पर निजी स्कूल है, जिसके रोजाना दर्जनों बड़े वाहन स्कूली बच्चों को छुट्टी के बाद घर छोड़ते हैं ऐसे में गुमटी पर रोजाना उन्हें घंटों जाम में फंसना पड़ता है.
बक्सर : ड्राइवर की लापरवाही कहें या रेलवे विभाग के अधिकारियों का ढीलापन. अक्सर 63227 अप पैसेंजर ट्रेन अपने निर्धारित समय से कई घंटा विलंब से रवाना होती है. जिससे यात्रियों को भारी मुसीबत उठानी पड़ रही है.
दरअसल शुक्रवार को स्थानीय रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या दो पर 63227 अप पैसेंजर ट्रेन लगभग सवा घंटे तक खड़ी रही. कारण का जब पता लगाया गया, तो मालूम हुआ कि मामला विभाग के अंदर चल रही अनियमितता की है. शुक्रवार को 63227 अप ट्रेन को दानापुर से बक्सर लाने वाला ड्राइवर रेस्ट लेता है. जबकि 63227 अप ट्रेन को मुगलसराय की ओर ले जाने का काम स्पेयर ड्राइवर का है जो 2295 संघमित्र से रोजाना बक्सर आता है. ड्राइवरों से बातचीत के दौरान मिली जानकारी के मुताबिक मुगलसराय से स्पेयर ड्राइवर समय से बक्सर नहीं पहुंच पाता है.
जिससे अंडर रेस्ट के ड्राइवरों पर ट्रेन को मुगलसराय ले जाने कीबात कही जाती है. अंडर रेस्ट ड्राइवरों का कहना है कि अपनी ड्यूटी के बाद पुन: ट्रेन को चलाना सुरक्षा को नजरअंदाज करने जैसा है. अक्सर ड्राइवर की लापरवाही के कारण परिचालन बाधित होता है और यात्रियों का गुस्सा ट्रेन और रेल संपत्तियों पर होता है.

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