Buxar News (प्रशांत कुमार राय) : बक्सर-जिले में सड़क और पुल निर्माण परियोजनाओं के नाम पर लगातार पेड़ों की कटाई जारी है. एक ओर जहां बेहतर सड़क और यातायात सुविधा के लिए बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हजारों पेड़ों की बलि से पर्यावरण संतुलन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. बीते वर्षों में एनएच-84 और एनएच-81 के निर्माण के दौरान 11 हजार 420 पेड़ों की कटाई की गई थी. अब शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क चौड़ीकरण तथा पुल निर्माण परियोजनाओं के लिए फिर से सैकड़ों पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई है.
अब तक कुल 11,420 पेड़ों की हुई कटाई
जानकारी के अनुसार, वन प्रमंडल आरा के तहत वर्ष 2012 में एनएच-84 और एनएच-81 के निर्माण कार्य की शुरुआत हुई थी, जो वर्ष 2024 में जाकर पूरी हुई. निर्माण अवधि के दौरान एनएच-84 में 8309 पेड़ों और एनएच-81 में 3111 पेड़ों की कटाई की गई. इस प्रकार दोनों राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में कुल 11 हजार 420 पेड़ काटे गए. इन पेड़ों में कई पुराने और छायादार वृक्ष शामिल थे, जो वर्षों से पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे.
पेड़ों की कटाई का अगला आदेश हुआ जारी
अब शहर में चल रही नई परियोजनाओं के लिए भी वन विभाग ने पेड़ काटने की अनुमति प्रदान की है. बड़ी मस्जिद से सेंट्रल जेल रोड तक सड़क चौड़ीकरण कार्य में 178 पेड़ों की कटाई होगी.वहीं गोलंबर से ज्योति चौक तक सड़क चौड़ीकरण के लिए 470 पौधों को हटाया जाएगा. इसके अलावा बक्सर-भरोली पुल निर्माण परियोजना के लिए 107 पेड़ों तथा भोजपुर-सिमरी सड़क चौड़ीकरण कार्य में 98 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई है .
पेड़ों की लगातार कटाई से तापमान में हुई बढ़ोतरी, विशेषज्ञ भी चिंता में
इस तरह नई परियोजनाओं में कुल 853 पेड़ और पौधे काटे जाएंगे.पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही पेड़ों की कटाई से जिले का तापमान बढ़ रहा है और वायु गुणवत्ता प्रभावित हो रही है. पेड़ केवल ऑक्सीजन देने का काम नहीं करते, बल्कि भूजल संरक्षण, वर्षा संतुलन और प्रदूषण नियंत्रण में भी अहम भूमिका निभाते हैं. शहरों में हरियाली कम होने से गर्मी का असर और अधिक महसूस किया जा रहा है.
शून्य है जमीन पर पौधारोपण की स्थिति
स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है. सड़क निर्माण के दौरान जितने पेड़ काटे जाएं, उसके बदले कई गुना अधिक पौधारोपण सुनिश्चित होना चाहिए. हालांकि विभागीय स्तर पर पौधारोपण की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसकी निगरानी और देखभाल की कमी अक्सर देखने को मिलती है.
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना अनिवार्य
वन विभाग के रेंजर सुरेश कुमार के अनुसार, निर्माण एजेंसियों को निर्धारित नियमों के तहत ही पेड़ काटने की अनुमति दी जाती है और बदले में पौधारोपण की शर्त भी लागू रहती है. बावजूद इसके पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें पेड़ बनने तक संरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है. लगातार घटती हरियाली और बढ़ती निर्माण परियोजनाओं के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए.
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