BPSC Success Story: बेतिया के मच्छरगांवा नगर पंचायत की रहने वाली साक्षी कुमारी ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. घर में किराना दुकान चलाने वाले चंद्र भूषण प्रसाद जायसवाल और गृहिणी सीमा देवी की बेटी साक्षी का चयन 70वीं बीपीएससी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में ग्रामीण विकास अधिकारी (RDO) पद के लिए हुआ है. साधारण परिवार से आने वाली साक्षी की इस सफलता से पूरे इलाके में खुशी का माहौल है.
साक्षी की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत और सेल्फ स्टडी के दम पर यह मुकाम हासिल किया है. रविवार को पटना से घर लौटने पर उनके स्वागत की विशेष तैयारी की गई है.
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बिहार बोर्ड की टॉपर रह चुकी हैं साक्षी
साक्षी की शुरुआती पढ़ाई गांव के आदर्श उच्च विद्यालय से हुई. मैट्रिक में बेहतर प्रदर्शन के बाद उनका नामांकन राम रूप गोस्वामी इंटर कॉलेज में कराया गया. वर्ष 2020 में उन्होंने बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा में कला संकाय से स्टेट टॉपर बनकर पूरे राज्य में पहचान बनाई थी.
दिलचस्प बात यह है कि उस दौरान उन्होंने मुख्य रूप से ऑनलाइन पढ़ाई और स्वाध्याय के सहारे तैयारी की थी. इंटर के बाद उन्होंने बगहा के बाबा भूतनाथ डिग्री कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और वर्ष 2024 में प्रथम श्रेणी से ग्रेजुएशन पास किया.
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पहले ही प्रयास में मिली सफलता
ग्रेजुएशन के बाद साक्षी ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की. परिवार ने अपनी क्षमता के अनुसार उन्हें हर संभव सहयोग दिया. इसका नतीजा यह रहा कि साक्षी ने पहले ही प्रयास में बीपीएससी परीक्षा पास कर ग्रामीण विकास अधिकारी का पद हासिल कर लिया.
साक्षी ने बताया कि उन्होंने 71वीं बीपीएससी संयुक्त परीक्षा भी दी है और वह साक्षात्कार के लिए चयनित हो चुकी हैं.
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अब यूपीएससी है अगला लक्ष्य
ग्रामीण विकास अधिकारी बनने के बावजूद साक्षी ने अपने सपनों को यहीं तक सीमित नहीं रखा है. उनका कहना है कि वह बीपीएससी की तैयारी जारी रखने के साथ-साथ यूपीएससी परीक्षा की भी तैयारी कर रही हैं.
साक्षी का मानना है कि लक्ष्य बड़ा होना चाहिए और उसके लिए लगातार मेहनत करते रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि सफलता किसी एक परीक्षा से नहीं, बल्कि सीखने और आगे बढ़ने की निरंतर प्रक्रिया से मिलती है.
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बेटियों को अवसर देने की जरूरत
साक्षी ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के विश्वास और समर्थन को दिया. उन्होंने कहा कि समाज में आज भी कई बेटियों को अवसर नहीं मिल पाता, जिससे उनके सपने अधूरे रह जाते हैं.
उनका संदेश है कि माता-पिता को बेटा और बेटी में भेदभाव नहीं करना चाहिए. यदि बेटियों को भी समान अवसर और सहयोग मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं.
बेतिया से रवि ‘रंक’ की रिपोर्ट
