नौ पंचायतों में भूमि के अभाव में खेल मैदान का निर्माण अधर में

ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देने और खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना हर पंचायत में खेल मैदान प्रखंड के कुछ क्षेत्रों में भूमि संकट के कारण अटक गई है.

बिहारशरीफ़ ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देने और खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना हर पंचायत में खेल मैदान प्रखंड के कुछ क्षेत्रों में भूमि संकट के कारण अटक गई है. हरनौत प्रखंड की 9 पंचायतों में अभी तक खेल मैदान निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो सका है, जबकि 7 पंचायतों में खेल मैदान तैयार हो चुके हैं. बिहार सरकार की इस योजना के तहत मनरेगा योजना के माध्यम से प्रत्येक पंचायत में खेल मैदान का निर्माण किया जाना है. इसका उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर युवाओं को खेल गतिविधियों से जोड़ना और उनकी प्रतिभा को निखारने का अवसर देना है. प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी (बीपीओ) राजीव कुमार रंजन ने जानकारी दी कि खेल मैदान निर्माण के लिए अधिकतम 10 लाख रुपये की राशि निर्धारित की गई है. भूमि उपलब्धता के अनुसार खेल मैदान को तीन श्रेणियों (छोटा, मध्यम, बड़ा) में बांटा गया है, छोटा खेल मैदान 1 एकड़ जमीन, मध्यम खेल मैदान 1-1.5 एकड़,बड़ा खेल मैदान 1.5-4 एकड़. अब तक लोहरा (लोहरा), बसनियावां (नर्चवार), नेहुसा (दैली), तेलमर (तेलमर), कोलावां (अमरपुरी), बराह (कल्याण विगहा) और चौरिया (गोखुलपुर) पंचायतों में खेल मैदान निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है. इन खेल मैदानों में न्यूनतम चार प्रकार के खेलों बास्केटबॉल, बैडमिंटन, वॉलीबॉल और रनिंग ट्रैक की व्यवस्था की गई है.यदि अतिरिक्त जमीन उपलब्ध होती है तो फुटबॉल, क्रिकेट और कबड्डी जैसे बड़े खेलों के लिए भी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. बीपीओ ने बताया कि बाकी पंचायतों में भूमि चिन्हित नहीं हो पाने के कारण कार्य शुरू नहीं हो पाया है. उन्होंने इस देरी के लिए स्थानीय प्रशासनिक उदासीनता और जन प्रतिनिधियों के असहयोग को भी जिम्मेदार ठहराया. प्रशासनिक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं ताकि जल्द से जल्द उपयुक्त भूमि चिन्हित कर कार्य शुरू कराया जा सके.गोनावां पंचायत के मुखिया अमरेश उपाध्याय ने कहा, पहले गांव के बच्चे खेत-खलिहान में खेलते थे, लेकिन अब उन्हें गांव में ही शहर जैसी सुविधाएं मिल रही हैं. यह युवाओं के लिए बहुत बड़ा अवसर है क्योंकि आज खेलों में भी करियर की अपार संभावनाएं हैं.उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे भूमि चयन और कार्यान्वयन में सकारात्मक भूमिका निभाएं, ताकि सभी पंचायतों में जल्द से जल्द खेल मैदान का सपना साकार हो सके.

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Published by: Santosh kumar singh

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