अयोध्या के राम मंदिर की तरह नालंदा में बने भव्य ज्ञान मंदिर

अयोध्या के राममंदिर की तर्ज पर ज्ञानपीठ नालंदा में एक भव्य ””””ज्ञान मंदिर ग्रंथागार”””” का निर्माण कराने की मांग होने लगी है.

राजगीर. अयोध्या के राममंदिर की तर्ज पर ज्ञानपीठ नालंदा में एक भव्य ””””””””””””””””ज्ञान मंदिर ग्रंथागार”””””””””””””””” का निर्माण कराने की मांग होने लगी है. जिस तरह अयोध्या का भव्य राममंदिर भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का प्रतीक बन गया है, उसी तरह नालंदा का ””””””””””””””””ज्ञान मंदिर ग्रंथागार”””””””””””””””” भारत की प्राचीन शैक्षणिक परंपरा और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन सकता है. नालंदावासियों की मांग है कि ज्ञान की भूमि नालंदा में एक भव्य ””””””””””””””””ज्ञान मंदिर ग्रंथागार का निर्माण किया जाय. इससे भारत की प्राचीन शैक्षणिक विरासत पुनर्जीवित होगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से यह मांग की गयी है. प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के आसपास प्राचीन काल की तरह नौ मंजिला तीन भव्य ग्रंथागारों का निर्माण कराने की मांग की गयी है. यह आधुनिक भारत को उसकी बौद्धिक जड़ों से फिर से जोड़ सकेगा. राष्ट्रकवि दिनकर न्यास अध्यक्ष नीरज कुमार ने कहा है कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय विश्व की सबसे पुरानी और प्रसिद्ध शिक्षण संस्थाओं में से एक है. यहां तक्षशिला, चीन, तिब्बत, जापान, कोरिया सहित अन्य देशों से ज्ञान अर्जित करने लोग आते थे. यहां के तीन मुख्य ग्रंथागार रत्नसागर, रत्नोदधि और रत्नरंजक नौ मंजिला भवनों में स्थापित थे. उनमें लाखों पांडुलिपियां और ग्रंथ संरक्षित थे. वह पुस्तकालय न केवल भारत की बौद्धिक शक्ति का प्रतीक था, बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए एक प्रेरणा केंद्र भी था. उन्होंने कहा है कि भारत अपने गौरवशाली इतिहास को फिर से पुनर्जीवित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. नालंदा विश्वविद्यालय इसका सर्वोत्तम उदाहरण है. अब आवश्यकता है कि नालंदा में आधुनिक एवं उच्च तकनीकी युक्त एक भव्य ””””””””””””””””ज्ञान मंदिर ग्रंथागार”””””””””””””””” का निर्माण हो. यह ज्ञान मंदिर न केवल अनुसंधान और अध्ययन का केंद्र बनेगा, बल्कि भारत के गौरवशाली अतीत को भी विश्व के सामने लाएगा. यहां प्राचीन भारतीय दर्शन, विज्ञान, गणित, आयुर्वेद, खगोलशास्त्र, रसायन विज्ञान सहित अन्य भाषाओं से जुड़े दुर्लभ ग्रंथों, पांडुलिपि को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जा सकेगा. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अनुरोध किया गया है कि वे इस ऐतिहासिक आवश्यकता को समझते हुए नालंदा में ऐसे नौ मंजिला तीन विशाल ग्रंथागारों का निर्माण करायें. उन्होंने कहा है कि इसका उद्देश्य केवल एक लाइब्रेरी का निर्माण नहीं है, बल्कि भारत की बौद्धिक धरोहर को विश्व के समक्ष पुनः प्रस्तुत करना है. यह स्थल फिर से विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और ज्ञान के जिज्ञासुओं के लिए तीर्थस्थल बने यह प्रयास है. जिस प्रकार अयोध्या का राममंदिर आस्था का प्रतीक है, उसी प्रकार यह ज्ञान मंदिर बौद्धिक चेतना और अध्यात्म का केन्द्र बनेगा. यह ज्ञान मंदिर न केवल भारत को उसकी खोई हुई शैक्षणिक विरासत से जोड़ेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत को ज्ञान की भूमि के रूप में पुनः प्रतिष्ठित करेगा. प्राचीन काल की तरह नालंदा फिर से विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर साबित होगा.

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Published by: Santosh kumar singh

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