बिहारशरीफ के गिरियक गांव की मिट्टी से निकलकर बड़े संस्थान में पढ़ाई का सपना देखने वाली गिरियक प्रखंड के दशरथपुर गांव की बेटी अंकिता सुमन ने अपनी मेहनत से सफलता की नई मिसाल कायम की है. सैनिक अभिजीत सुमन की पुत्री अंकिता ने पुणे स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) की प्रवेश परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया है. उन्होंने श्रेणी में 640वीं और सामान्य श्रेणी में 2972वीं रैंक हासिल की है. अंकिता की इस उपलब्धि से परिवार के साथ पूरे गांव में खुशी का माहौल है.
करीब पांच वर्षों से लगातार पढ़ाई, अनुशासन और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखने का परिणाम है कि अंकिता ने राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा में अपनी जगह बनाई. उनकी सफलता के बाद माता-पिता, दादा-दादी और ग्रामीणों ने खुशी जतायी है. अंकिता अब विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़कर वैज्ञानिक बनना चाहती हैं और देश की सेवा करने का सपना देख रही हैं.
IIT में चयन के बाद भी चुना रिसर्च का रास्ता
अंकिता का चयन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के लिए भी हुआ था. उनके सामने इंजीनियरिंग की पढ़ाई का विकल्प मौजूद था, लेकिन उन्होंने अपने रुचि और भविष्य के लक्ष्य को देखते हुए IISER में दाखिला लेने का फैसला किया.
अंकिता का मानना है कि विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में काम करने से उन्हें अपनी रुचि को आगे बढ़ाने का बेहतर अवसर मिलेगा. वह उच्च शिक्षा के साथ रिसर्च के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहती हैं. उनका लक्ष्य आगे चलकर वैज्ञानिक बनना और देश के विकास में योगदान देना है.
पावापुरी के स्कूल से शुरू हुई पढ़ाई
अंकिता की प्रारंभिक शिक्षा पावापुरी स्थित तीर्थंकर विद्यालय से हुई. स्कूल के दिनों से ही वह पढ़ाई को लेकर गंभीर रहती थीं. शांत स्वभाव और अनुशासित दिनचर्या के साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी.
प्रवेश परीक्षा की तैयारी के दौरान भी उन्होंने नियमित अध्ययन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाये रखा. करीब पांच साल की मेहनत के दौरान उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं भटकने दिया. सीमित संसाधनों के बीच भी उन्होंने अपनी तैयारी को लगातार बेहतर किया और आखिरकार राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में सफलता हासिल की.
बेटी की सफलता से परिवार में खुशी
अंकिता की सफलता की खबर मिलते ही परिवार में खुशी का माहौल बन गया. माता-पिता और दादा-दादी ने इसे अपने लिए गर्व का क्षण बताया. ग्रामीणों ने भी अंकिता को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.
परिवार के लोगों का कहना है कि अंकिता ने न केवल दशरथपुर गांव, बल्कि गिरियक प्रखंड और नालंदा जिले का नाम भी रोशन किया है. उनकी उपलब्धि से गांव के दूसरे बच्चों और खासकर बेटियों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी.
ग्रामीण बेटियों के लिए बनीं मिसाल
अंकिता की सफलता उन छात्राओं के लिए खास संदेश है, जो छोटे गांवों और सीमित संसाधनों के बीच रहकर बड़े लक्ष्य तय करती हैं. उन्होंने दिखाया है कि सफलता के लिए केवल बड़े शहरों की सुविधाएं ही जरूरी नहीं हैं. सही दिशा में लगातार मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता भी मंजिल तक पहुंचा सकती है.
अब अंकिता का अगला पड़ाव पुणे स्थित IISER होगा, जहां वह विज्ञान की उच्च शिक्षा हासिल करेंगी. पढ़ाई के साथ उनका ध्यान अनुसंधान पर रहेगा. वैज्ञानिक बनने का सपना लेकर आगे बढ़ रहीं अंकिता से परिवार और ग्रामीणों को उम्मीद है कि वह आने वाले समय में अपने क्षेत्र और जिले का नाम देशभर में रोशन करेंगी.
