इस्लामपुर नगर के गयाजी रोड स्थित वृन्दावन वाटिका के विशाल सभागार में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अन्तिम दिन सोमवार को वृंदावन धाम से आईं सुप्रसिद्ध भागवत कथा व्यास पूज्या डॉ. लवी मैत्रेयी शर्मा ने कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं का अत्यंत मार्मिक भावपूर्ण एवं भक्तिरस से परिपूर्ण वर्णन किया. कथा श्रवण के लिए हजारों की संख्या में महिला श्रद्धालु उपस्थित रहे और संपूर्ण सभागार “राधे-राधे” तथा “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा.
डॉ. लवी मैत्रेयी शर्मा जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतार केवल दुष्टों के विनाश के लिए ही नहीं, बल्कि भक्तों के कल्याण एवं धर्म की पुनः स्थापना के लिए हुआ। ऐसा परीक्षित जी से महाराज शुकदेव जी कह रहे है. उन्होंने भगवान के जन्मोत्सव, गोकुल आगमन, पूतना वध, शकटासुर एवं तृणावर्त का उद्धार, माखन चोरी, यशोदा मैया द्वारा भगवान के मुख में सम्पूर्ण ब्रह्मांड के दर्शन तथा उखल बंधन जैसी बाल लीलाओं का मार्मिक वर्णन. भगवान शुकदेव जी ने करते हुए बताया कि भगवान की प्रत्येक लीला जीव को प्रेम, भक्ति, सरलता और पूर्ण समर्पण का संदेश देती है.
कथा के दौरान उन्होंने भगवान शुकदेव जी ओर राजा परीक्षित जी का वर्णन विस्तार पूर्वक सुनाया. पूज्या कथावाचिका ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि जीवन में भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपनाकर प्रेम, करुणा, सेवा, विनम्रता तथा धर्ममय जीवन का अनुसरण करें. उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य माध्यम है.
परम पूज्य डॉ लवी मैत्रेयी शर्मा जी ने बताया कि कथा श्रोता ओर वक्ता दोनों का उद्धार करती हैं. इसलिए सभी भक्तगण कथा को श्रवण कर अपने जीवन को धन्य बनाए. कथा के उपरांत श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के भजनों पर भावपूर्ण कीर्तन किया तथा भगवान की आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ साप्ताहिक अनुष्ठान श्री मद भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ संपन्न हुआ.
