निजी विद्यालयों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत पढ़ने वाले विद्यार्थियों की प्रतिपूर्ति राशि वर्षों से लंबित रहने को लेकर निजी विद्यालय संघ हिलसा ने नाराजगी जताई है. संघ की ओर से सोमवार को प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को पत्र सौंपकर वर्ष 2019-20 से 2025-26 तक की बकाया प्रतिपूर्ति राशि का शीघ्र भुगतान कराने की मांग की गई है.
संघ के अध्यक्ष सत्येंद्र प्रसाद एवं सचिव अश्वनी कुमार समेत अन्य पदाधिकारियों की ओर से दिए गए पत्र में कहा गया है कि आरटीई के तहत विद्यालयों को मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि प्रति छात्र अभी तक निर्गत नहीं की गई है. आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के कारण निजी विद्यालयों की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है.
पत्र में कहा गया है कि विद्यालयों के पास ऐसी कोई व्यवस्था अथवा पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं है, जिससे विभाग की ओर से मांगी जाने वाली ऑनलाइन जानकारी अथवा आंकड़ों को समय पर जमा किया जा सके. इसके बावजूद विद्यालय संचालक आरटीई के तहत बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं.
निजी विद्यालय संघ की आमसभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आरटीई के तहत छह वर्षों की बकाया प्रतिपूर्ति राशि अविलंब उपलब्ध कराई जाए. संघ के सदस्यों ने इसके लिए विभाग को दो माह का समय देने का निर्णय लिया है.
संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि में बकाया प्रतिपूर्ति राशि निर्गत नहीं की जाती है तो निजी विद्यालय संघ की ओर से विभागीय कार्यों में अभी तत्काल से ही सहयोग न करने को लेकर कड़ा निर्णय लिया जा चुका है. साथ ही आरटीई के तहत विद्यार्थियों को नि:शुल्क पढ़ाने को लेकर भी संघ ने 31 अक्टूबर के बाद कड़ा निर्णय लेंगें.
संघ ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से आग्रह किया है कि वर्ष 2019-20 से 2025-26 तक की बकाया प्रतिपूर्ति राशि शीघ्र निर्गत कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि निजी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक-कर्मचारियों एवं विद्यालयों के लंबित कार्य सुचारू रूप से चलते रहें.
