रक्षाबंधन 2026: 20 साल में बदल गया पर्व का स्वरूप, तकनीक और कारोबार ने बदली परंपरा

रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा, लेकिन इसकी रौनक बाजारों में अभी से दिखने लगी है. पिछले 20 सालों में त्योहार के स्वरूप में बड़ा बदलाव आया है, जहां तकनीक और बाजार ने परंपराओं को नया आयाम दिया है. जानिए कैसे.

rakshabandhan News: भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह का पर्व रक्षाबंधन इस वर्ष 28 अगस्त को मनाया जाएगा. पर्व में अभी कुछ सप्ताह शेष हैं, लेकिन जिले के बाजारों में इसकी रौनक अभी से दिखाई देने लगी है. शहर के प्रमुख बाजार, शॉपिंग मॉल, गिफ्ट गैलरी, मिठाई दुकानें, आभूषण प्रतिष्ठान और ऑनलाइन कारोबारियों ने त्योहार को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं.

राखी से पहले बाजार में गिफ्ट और ऑफरों की धूम

शहर के मुख्य चौक-चौराहों से लेकर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक बड़े-बड़े बैनर, पोस्टर और डिजिटल डिस्प्ले के माध्यम से रक्षाबंधन ऑफरों का प्रचार किया जा रहा है. सोशल मीडिया और प्रचार-वाहनों के जरिए भी कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं. राखियों से पहले गिफ्ट पैकेज, चॉकलेट हैम्पर, ड्राई फ्रूट बॉक्स, स्मार्ट गैजेट, घड़ियां, परफ्यूम, आभूषण और पर्सनलाइज्ड उपहार बाजार में प्रमुखता से उपलब्ध हैं.

20 वर्षों में बदली रक्षाबंधन की तस्वीर

करीब दो दशक पहले रक्षाबंधन मुख्य रूप से पारिवारिक भावनाओं का त्योहार माना जाता था. बहनें साधारण सूती राखी खरीदती थीं या स्वयं तैयार करती थीं. घर में बनी मिठाइयों से भाई का मुंह मीठा कराया जाता था और उपहार के रूप में नकद राशि या कपड़े दिए जाते थे. दूर रहने वाले भाइयों तक राखी पहुंचाने के लिए डाक विभाग सबसे भरोसेमंद माध्यम हुआ करता था.

तकनीक ने बदला त्योहार मनाने का तरीका

आज तकनीक ने इस परंपरा का स्वरूप काफी बदल दिया है. अब डिजाइनर, चांदी, नाम और फोटो वाली पर्सनलाइज्ड राखियां ऑनलाइन ऑर्डर की जा रही हैं. वीडियो कॉल पर राखी की रस्म निभाई जा रही है. डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन गिफ्ट और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म इस पर्व का अहम हिस्सा बन चुके हैं.

बाजार में बढ़ी प्रीमियम राखियों और गिफ्ट की मांग

राखी विक्रेता विजय मालाकार का कहना है कि इस वर्ष भी डिजाइनर राखियों, बच्चों के लिए कार्टून थीम, इको-फ्रेंडली और प्रीमियम राखियों की मांग रहने की संभावना है. मिठाई दुकानों, गिफ्ट शॉप और ज्वेलरी प्रतिष्ठानों ने भी विशेष ऑफर शुरू कर दिए हैं. व्यापारियों को उम्मीद है कि पर्व नजदीक आने के साथ खरीदारी में तेजी आएगी.

संयुक्त परिवारों से डिजिटल रिश्तों तक का सफर

रोजगार, शिक्षा और पलायन के कारण बड़ी संख्या में लोग बिहार से देश-विदेश के विभिन्न शहरों में रह रहे हैं. ऐसे में हर भाई-बहन का रक्षाबंधन पर आमने-सामने मिलना संभव नहीं हो पाता. वीडियो कॉल, कूरियर सेवा और ऑनलाइन गिफ्ट ने दूरियों को कम करने का नया माध्यम उपलब्ध कराया है. हालांकि व्यक्तिगत मुलाकातों की संख्या पहले की तुलना में कम हुई है.

लोग बोले- रिश्तों की मिठास सबसे बड़ी पूंजी

शहरवासी विकास कुमार उर्फ गांधी जी, बैंककर्मी विजय कुमार, शिक्षक टिंकू कुमार, सोशल मीडिया एडमिन महतो और कारोबारी शिशुकांत कुमार का कहना है कि रक्षाबंधन का स्वरूप आधुनिक जरूर हुआ है, लेकिन इसकी मूल भावना नहीं बदलनी चाहिए.

उनका कहना है कि पहले बहनें अपने हाथों से राखी बनाती थीं, घर में मिठाइयां तैयार होती थीं और पूरा परिवार साथ मिलकर त्योहार मनाता था. आज सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन समय की कमी और व्यस्त जीवनशैली के कारण पारिवारिक मेल-मिलाप पहले जैसा नहीं रहा. ऑनलाइन उपहार और महंगे गिफ्ट अपनी जगह हैं, लेकिन भाई-बहन का स्नेह और अपनापन सबसे अधिक मूल्यवान है.

परंपरा और आधुनिकता का संगम बना रक्षाबंधन

सामाजिक जानकारों का मानना है कि रक्षाबंधन अब परंपरा और आधुनिकता का संगम बन चुका है. बाजारवाद और तकनीक ने पर्व के स्वरूप को नया आयाम दिया है, लेकिन इसकी आत्मा आज भी भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प में ही बसती है.

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By Kanchan kumar

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