राजगीर में लाखों के डॉग फीडर बने शोपीस, न भोजन मिल रहा न पानी; आवारा कुत्तों की समस्या बरकरार

राजगीर में नगर परिषद द्वारा बनाए गए लाखों के डॉग फीडर स्टेशन रखरखाव और नियमित व्यवस्था के अभाव में बेकार साबित हो रहे हैं. आवारा कुत्तों की समस्या से स्थानीय लोग और पर्यटक अब भी परेशान हैं. जानिए क्यों ये योजनाएं विफल हो रही हैं.

Rajgir Dog Feeder Station : पर्यटक शहर राजगीर में आवारा कुत्तों की समस्या एक ओर स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर नगर परिषद की ओर से इन कुत्तों के लिए बनाये गये डॉग फीडर स्टेशन अपनी उपयोगिता खोने लगे हैं.

नगर परिषद ने शहर के सभी 32 वार्डों में आवारा कुत्तों को निर्धारित स्थान पर भोजन और पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से डॉग फीडर स्टेशन बनाया था, लेकिन नियमित व्यवस्था के अभाव में ये महज शोभा की वस्तु बनकर रह गए हैं.

रखरखाव और नियमित भोजन-पानी का अभाव

स्थानीय लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों से लोग पहले से परेशान हैं और उनसे यह उम्मीद करना कि वे नियमित रूप से फीडर में भोजन डालेंगे, व्यावहारिक नहीं है. लोगों का तर्क है कि जब नगर परिषद ने लाखों रुपये खर्च कर फीडर बनाए हैं, तो इनके संचालन, साफ-सफाई और नियमित भोजन-पानी की व्यवस्था की जिम्मेदारी भी नगर परिषद को ही उठानी चाहिए, क्योंकि रखरखाव के अभाव में इनमें न भोजन दिखता है और न पानी.

योजना के उद्देश्य और वर्तमान हकीकत

नगर परिषद का उद्देश्य सड़कों पर इधर-उधर भोजन फेंकने के बजाय आवारा कुत्तों को निर्धारित स्थान पर भोजन कराना था, लेकिन उचित व्यवस्था नहीं होने से सड़कों पर कुत्तों का जमावड़ा कम नहीं हुआ और राहगीरों के साथ होने वाली घटनाओं में भी कमी नहीं आयी.

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नगर परिषद के अनुसार फिलहाल फीडर स्टेशन स्थापित किये गये हैं और भोजन की व्यवस्था परिषद द्वारा नहीं की जा रही, जिससे योजना के वास्तविक उद्देश्य पर सवाल उठ रहे हैं.

अधिकारियों का पक्ष और भावी योजनाएं

कार्यपालक पदाधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि नगर परिषद क्षेत्र के सभी 32 वार्डों में डॉग फीडर स्टेशन बनाया गया है, और यहां कुत्तों के लिए भोजन-पानी के साथ इलाज तथा रेबीज का टीका उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी, साथ ही आक्रामक और बीमार कुत्तों के लिए अलग व्यवस्था रखने की भी योजना है.

स्थानीय समस्याएं और स्थायी समाधान की जरूरत

शहर की सड़कों और चौराहों पर आवारा कुत्तों का जमावड़ा यातायात को प्रभावित करता है और बाजारों में अफरातफरी बनती है जिसका असर स्कूली बच्चों व पर्यटकों पर पड़ता है.

जानकारों का कहना है कि डॉग फीडर के साथ-साथ नसबंदी, नियमित टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और फीडरों की नियमित निगरानी व साफ-सफाई सुनिश्चित करनी होगी, तभी यह योजना जमीन पर प्रभावी साबित हो सकेगी.


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लेखक के बारे में

By रामविलास प्रसाद

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