रक्षाबंधन पर महंगाई की मार: चीनी-रिफाइंड से दूध-मावा तक महंगा, घेवर से काजू कतली और रसगुल्ले तक बढ़े दाम

रक्षाबंधन की खुशियों पर महंगाई का साया मंडरा रहा है. चीनी, मावा, दूध जैसे कच्चे माल की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण मिठाइयां ₹50 तक महंगी हो गई हैं. इससे खरीदार कीमत पूछकर ही मिठाई खरीद रहे हैं, जिससे त्योहार की मिठास पर असर पड़ रहा है.

Rakshabandhan sweets price hike: रक्षाबंधन की आहट के साथ बिहारशरीफ का बाजार रंगीन हो गया है. भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के प्रतीक इस त्योहार को लेकर मिठाई दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ने लगी है. बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधने की तैयारी कर रही हैं, वहीं भाई भी बहनों के लिए उपहार और मिठाई खरीदने में जुटे हैं. हालांकि, इस बार त्योहार की मिठास पर महंगाई का असर साफ दिखाई दे रहा है. मिठाई की दुकानों पर पहुंच रहे ग्राहक पहले कीमत पूछ रहे हैं और उसके बाद अपनी जेब के हिसाब से खरीदारी कर रहे हैं.

मिठाई कारोबारियों के अनुसार चीनी, रिफाइंड, दूध, मावा, छेना, ड्राई फ्रूट्स और अन्य जरूरी कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. इससे मिठाई बनाने की लागत बढ़ गयी है. कारोबारियों का कहना है कि कच्चे माल के दाम बढ़ने के कारण मिठाइयों की कीमतों में भी वृद्धि करना मजबूरी बन गया है. त्योहार के मौके पर मांग बढ़ने के बावजूद महंगे दाम के कारण कई ग्राहक पहले की तुलना में कम मात्रा में मिठाई खरीद रहे हैं.

कीमत पूछकर ही खरीदारी कर रहे ग्राहक

रक्षाबंधन के लिए मिठाई खरीदने बाजार पहुंचे ग्राहकों के व्यवहार में भी बदलाव नजर आ रहा है. पहले कई ग्राहक बिना ज्यादा पूछताछ किए एक से दो किलो तक मिठाई खरीद लेते थे, लेकिन इस बार डिब्बा पसंद करने के बाद कीमत पूछना उनकी पहली प्राथमिकता बन गयी है. कई परिवार बजट तय करने के बाद उसी के अनुसार मिठाई खरीद रहे हैं.

ग्राहकों का कहना है कि रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर मिठाई खरीदना परंपरा का हिस्सा है. ऐसे में पूरी तरह मिठाई से दूरी बनाना संभव नहीं है, लेकिन बढ़ी कीमतों ने खर्च जरूर बढ़ा दिया है. परिवारों को मिठाई के साथ राखी और उपहार के खर्च का भी हिसाब रखना पड़ रहा है.

घेवर और काजू कतली की खास मांग

रक्षाबंधन के अवसर पर पारंपरिक मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है. इनमें घेवर, काजू कतली, रसगुल्ला, गुलाब जामुन, लड्डू, पेड़ा और छेना से तैयार विभिन्न मिठाइयां प्रमुख हैं. खासकर घेवर की मांग रक्षाबंधन के आसपास बढ़ जाती है. इसके अलावा काजू कतली और ड्राई फ्रूट्स वाली मिठाइयों को भी ग्राहक पसंद कर रहे हैं.

मिठाई दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक अब स्वाद के साथ कीमत का भी विशेष ध्यान रख रहे हैं. कुछ ग्राहक महंगी मिठाइयों की जगह सामान्य रेंज की मिठाइयां खरीद रहे हैं, जबकि कुछ लोग कम मात्रा में पसंदीदा मिठाई लेकर त्योहार की परंपरा निभा रहे हैं.

कच्चे माल की बढ़ी कीमत से कारोबारियों की बढ़ी चुनौती

मिठाई कारोबारियों के लिए भी इस बार चुनौती कम नहीं है. एक ओर त्योहार के कारण ग्राहकों की संख्या बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर कच्चे माल की बढ़ी कीमतों ने लागत बढ़ा दी है. दुकानदारों को मिठाई की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ कीमत को ग्राहकों की पहुंच में रखने की कोशिश करनी पड़ रही है.

कारोबारियों के मुताबिक दूध, मावा, चीनी और ड्राई फ्रूट्स जैसे सामान मिठाई निर्माण के प्रमुख आधार हैं. इनमें किसी भी सामान की कीमत बढ़ने का सीधा असर तैयार मिठाई पर पड़ता है. इसके अलावा पैकिंग, डिब्बे और अन्य खर्च भी बढ़े हैं. ऐसे में पुरानी कीमत पर मिठाई बेचने से कारोबारियों का मुनाफा प्रभावित हो रहा है.

त्योहार की रौनक बरकरार, लेकिन जेब पर असर

महंगाई के बावजूद बाजार में रक्षाबंधन की रौनक बनी हुई है. मिठाई के साथ राखी और गिफ्ट की दुकानों पर भी ग्राहक पहुंच रहे हैं. भाई अपनी बहनों के लिए पसंद की मिठाई और उपहार खरीद रहे हैं. बहनों में भी त्योहार को लेकर उत्साह है.

हालांकि, बढ़ी कीमतों के कारण इस बार कई परिवार त्योहार का बजट पहले से तय कर रहे हैं. ग्राहकों का कहना है कि रिश्तों की मिठास के लिए मिठाई जरूरी है, लेकिन महंगाई के दौर में जेब का हिसाब रखना भी उतना ही जरूरी हो गया है.

मिठाई कारोबारियों को उम्मीद है कि रक्षाबंधन के दिन बिक्री में और तेजी आएगी. त्योहार के अंतिम दिनों में बाजार में भीड़ बढ़ने की संभावना है. कारोबारियों ने भी ग्राहकों की मांग को देखते हुए विभिन्न प्रकार की मिठाइयों का स्टॉक तैयार करना शुरू कर दिया है. इस बार रक्षाबंधन पर राखी की मजबूत डोर के साथ मिठाई का डिब्बा भी लोगों की जेब पर पहले से ज्यादा भारी पड़ता नजर आ रहा है.

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लेखक के बारे में

By सुनील कुमार

सुनील कुमार वर्ष 2015 से प्रभात खबर, बिहारशरीफ-नालंदा में फोटोग्राफर सह जिला संवाददाता के रूप में पत्रकारिता कर रहे हैं. खबरों की सटीकता, बेहतरीन फोटोग्राफी और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना उनकी पहचान बन चुकी है. पत्रकारिता जीवन में इन्होंने कई दैनिक अखबारों के अलावा डिजिटल मीडिया के लिए भी संवाददाता का कार्य किया है.

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