Nalanda News (रामविलास की रिपोर्ट)
अध्यात्म, आस्था और सनातन परंपराओं के अद्भुत संगम के रूप में विख्यात पुरुषोत्तम मास (मलमास मेला)-2026 का समापन सोमवार को सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चारण, शंखनाद और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच संपन्न हो गया. एक माह तक चले इस ऐतिहासिक धार्मिक मेले की पूर्णाहुति धर्मध्वज अवतरण के साथ हुई. मेले के दौरान देश-विदेश से आए करीब तीन करोड़ श्रद्धालुओं ने राजगीर के पवित्र ब्रह्मकुंड और सप्तधारा में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया.
धर्मध्वज अवतरण के साथ हुई आधिकारिक पूर्णाहुति
मेला समापन के अवसर पर ब्रह्मकुंड क्षेत्र स्थित धर्मध्वज स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं, तीर्थ पुरोहितों और पंडा समाज के लोगों की भारी भीड़ जुटी रही. वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच धार्मिक ध्वज की विशेष पूजा-अर्चना की गई. इसके बाद शंखनाद और मंगलाचरण के साथ धर्मध्वज को विधिवत अवतरित कर निर्धारित स्थान पर सुरक्षित रखा गया. धार्मिक मान्यता के अनुसार धर्मध्वज के दर्शन और स्पर्श से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. यही कारण रहा कि ध्वज अवतरण के दौरान श्रद्धालुओं में दर्शन और स्पर्श करने की होड़ लगी रही.
ब्रह्मकुंड और सप्तधारा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
सोमवती अमावस्या के कारण मेले के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भीड़ चरम पर रही. तड़के सुबह से ही ब्रह्मकुंड और सप्तधारा में स्नान के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा. श्रद्धालुओं ने पवित्र कुंडों में स्नान कर भगवान विष्णु सहित विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि तथा लोककल्याण की कामना की.
एक माह तक चला आस्था का महापर्व
राजगीर-तपोवन तीर्थ रक्षार्थ पंडा कमेटी के अध्यक्ष नीरज कुमार और सचिव विकास उपाध्याय ने बताया कि एक माह तक चले इस महापर्व के दौरान देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी श्रद्धालु राजगीर पहुंचे. उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी और भारी भीड़ के बावजूद मेला शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ.
तकनीकी खराबी के कारण कुछ देर रुका स्नान
मेले के अंतिम दिन ब्रह्मकुंड के निकास मार्ग की सीढ़ी पर लगे स्टील पाइप में तकनीकी खराबी आने के कारण सुरक्षा के मद्देनजर कुछ समय के लिए स्नान पर रोक लगानी पड़ी. हालांकि प्रशासन और संबंधित कर्मियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मरम्मत कार्य पूरा कराया, जिसके बाद स्नान की प्रक्रिया फिर से शुरू कर दी गई.
प्रशासन और स्वयंसेवकों के सहयोग की सराहना
पंडा कमेटी के प्रवक्ता सुधीर कुमार उपाध्याय समेत अन्य पदाधिकारियों ने मेले के सफल संचालन के लिए जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, स्वयंसेवकों, स्थानीय नागरिकों और मीडिया के सहयोग की सराहना की. उन्होंने कहा कि राजगीर का मलमास मेला सनातन संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक है, जिसने एक बार फिर श्रद्धालुओं के मन पर अमिट छाप छोड़ी है.
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