Nalanda News (मुकुल नाथ सिन्हा): नालंदा जिले के बिंद प्रखंड अंतर्गत ताजनीपुर पंचायत के राजोपुर एवं सैदपुर गांव के दर्जनों जॉब कार्डधारी मजदूरों ने रोजगार उपलब्ध कराने की मांग को लेकर सोमवार को मनरेगा भवन पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया. इस दौरान प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी (पीओ) के अपने कार्यालय में मौजूद नहीं रहने के कारण मजदूरों में भारी आक्रोश देखा गया. नाराज मजदूरों ने मनरेगा कार्यालय परिसर में ही पीओ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रशासन के ढुलमुल रवैए पर आपत्ति जताई. धरना देने वाले प्रमुख मजदूरों में नाटू महतो, शिवन बिंद, बिजली बिंद, छोटे महतो, महेंद्र राउत, पूजा देवी, मानो देवी, संतरा देवी, गीता देवी, सुनैना देवी, पिंकी देवी, उमा देवी, धानो बिंद, लखन पासवान और आशा देवी मुख्य रूप से शामिल थे.
एक साल से नहीं मिला काम, भुखमरी की कगार पर पहुंचे परिवार
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि पिछले एक वर्ष से उन्हें मनरेगा के तहत कोई काम नहीं दिया गया है. इसके कारण उनके परिवारों के सामने अब भुखमरी की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है. मजदूरों ने कहा कि दैनिक मजदूरी से ही उनके घर का चूल्हा जलता है और काम न मिलने से उनके बच्चों का भरण-पोषण मुश्किल हो गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि वे रोजगार की गुहार लेकर पिछले चार दिनों से लगातार मनरेगा कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन पीओ के अपनी सीट पर न रहने के कारण उन्हें हर दिन निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा था.
तीन बजे पहुंचे पीओ, जल्द काम शुरू कराने के आश्वासन पर समाप्त हुआ धरना
मजदूरों के उग्र प्रदर्शन और मनरेगा भवन पर धरने की सूचना मिलने के बाद पीओ करीब तीन बजे अपने कार्यालय पहुंचे. इसके बाद आंदोलित मजदूरों ने अपनी समस्याओं को उनके समक्ष रखा. प्रमुख टूनो देवी ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पीओ के नियमित रूप से कार्यालय नहीं आने की यह कोई पहली शिकायत नहीं है. उनकी इस मनमानी और कार्यशैली की लिखित शिकायत सीधे नालंदा के जिलाधिकारी (डीएम) से की जाएगी.
अधिकारी का क्या है कहना
इस संबंध में मनरेगा पीओ राजीव रंजन ने बताया कि जॉब कार्डधारी मजदूरों की मांगें जायज हैं और उन्हें जल्द से जल्द रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा. उन्होंने आश्वासन दिया कि क्षेत्र में मजदूरों को काम देने के लिए एक दर्जन से अधिक नई योजनाओं की शुरुआत बहुत जल्द की जा रही है, जिससे सभी को काम मिल सकेगा. इस ठोस आश्वासन के बाद ही मजदूरों ने अपना धरना समाप्त किया.
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