Nalanda News : (कंचन कुमार) नालंदा जिला मुख्यालय बिहारशरीफ में अवैध गैस रिफिलिंग का कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है. शहर की मुख्य सड़कों से लेकर गली-मोहल्लों तक छोटे सिलेंडरों में खुलेआम गैस भरी जा रही है. इसका सबसे अधिक असर किराये पर रहकर पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों पर पड़ रहा है, जिन्हें मजबूरी में ऊंची कीमत चुकानी पड़ रही है.
दोगुनी कीमत पर बेची जा रही गैस
जानकारी के अनुसार कुछ समय पहले तक छोटे सिलेंडरों में गैस रिफिलिंग 80 से 85 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से होती थी. अब गैस की कथित कमी और बाजार की स्थिति का हवाला देकर 200 से 225 रुपये प्रति किलोग्राम तक वसूले जा रहे हैं. इससे छात्रों और निम्न आय वर्ग के लोगों का मासिक खर्च काफी बढ़ गया है.
गैस कनेक्शन नहीं, इसलिए बढ़ी मजबूरी
शहर में रहकर पढ़ाई करने वाले अधिकांश छात्रों और किरायेदारों के पास घरेलू एलपीजी कनेक्शन नहीं है. ऐसे में वे 3 से 5 किलो क्षमता वाले छोटे सिलेंडरों पर निर्भर हैं. नियमित और वैध गैस आपूर्ति की व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें अवैध रिफिलिंग केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है.
छात्र बहुल इलाकों में धड़ल्ले से चल रहा कारोबार
रामचंद्रपुर, गांधी नगर और अन्य छात्र-बहुल मोहल्लों में कई जनरल स्टोर्स और छोटी दुकानों के माध्यम से अवैध गैस रिफिलिंग का धंधा संचालित हो रहा है. बड़े घरेलू सिलेंडरों से छोटे सिलेंडरों में गैस ट्रांसफर कर मोटा मुनाफा कमाया जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कारोबार लंबे समय से चल रहा है.
20 से 22 हजार छात्रों पर पड़ रहा सीधा असर
सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार बिहारशरीफ में विभिन्न जिलों से आए करीब 20 से 22 हजार छात्र-छात्राएं रहकर पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. इनमें से 80 से 85 प्रतिशत छात्रों के पास अपना गैस कनेक्शन नहीं है. यही वजह है कि वे इस अवैध कारोबार का सबसे बड़ा शिकार बन रहे हैं.
हर महीने बढ़ रहा छात्रों का खर्च.
छात्रों का कहना है कि खाना बनाने के लिए उन्हें हर माह औसतन 4 से 5 किलो गैस की जरूरत पड़ती है. पहले यह खर्च काफी कम था, लेकिन मौजूदा दरों के कारण मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है. सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उन्हें अधिक भुगतान करना पड़ रहा है.
अवैध रिफिलिंग से बड़ा हादसा होने का खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू सिलेंडरों से छोटे सिलेंडरों में गैस भरना पूरी तरह अवैध और अत्यंत खतरनाक है. बिना सुरक्षा मानकों और उपकरणों के की जा रही रिफिलिंग से आग लगने या विस्फोट जैसी गंभीर घटनाओं की आशंका बनी रहती है. इसके बावजूद कई स्थानों पर यह कारोबार खुलेआम जारी है.
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
छात्रों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अवैध गैस रिफिलिंग केंद्रों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि छात्रावासों और किरायेदार छात्रों के लिए सुलभ एवं वैध गैस सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि उन्हें आर्थिक शोषण का सामना न करना पड़े.
शिक्षा का बड़ा केंद्र, लेकिन सुविधाओं की कमी
बिहारशरीफ पिछले तीन-चार दशकों में नालंदा के साथ-साथ नवादा, शेखपुरा, जमुई और लखीसराय के छात्रों के लिए प्रमुख शैक्षणिक केंद्र बन चुका है. यहां हजारों छात्र किराये के कमरों में रहकर पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. ऐसे में गैस जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी अब एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है.
कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ सकती है परेशानी
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इस अवैध कारोबार पर रोक नहीं लगाई गई तो छात्रों का आर्थिक शोषण और बढ़ेगा. साथ ही किसी भी समय सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण बड़ा हादसा भी हो सकता है.
