नालंदा से रणजीत सिंह की रिपोर्ट
Nalanda Biharsharif Asha Workers Protest Civil Surgeon News: नालंदा जिले के बिहारशरीफ से स्वास्थ्य महकमे के गलियारे से कर्मचारियों के आंदोलन की खबर सामने आई है. अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर बिहार राज्य आशा संघ के बैनर तले गुरुवार की दोपहर सैकड़ों आशा कार्यकर्ताओं ने सदर अस्पताल परिसर से लेकर प्रखंड चिकित्सा प्रभारी कार्यालय तक जुलूस निकाला. इस प्रदर्शन के दौरान आंदोलित आशा कार्यकर्ताओं ने सिविल सर्जन (CS) और स्थानीय चिकित्सा प्रभारी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की प्रशासन तक अपनी गूंज पहुंचाई.
शहरी आशाओं को सदर अस्पताल में काम करने से रोकने पर आक्रोश
प्रखंड चिकित्सा प्रभारी कार्यालय के मुख्य द्वार के सामने रानी कुमारी के संचालन में एक विरोध सभा आयोजित की गई, जहां प्रशासनिक व्यवस्था पर कड़े सवाल दागे गए. सभा को संबोधित करते हुए संघ के महासचिव कौशलेन्द्र कुमार वर्मा ने स्वास्थ्य प्रशासन पर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि स्थानीय शहरी आशाओं को सदर अस्पताल में काम नहीं करने दिया जा रहा है, जबकि अस्पताल में बाहरी महिलाओं और सुरक्षा गार्डों के जरिए गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी कराई जा रही है.
महासचिव ने सवाल उठाया कि शहरी आशाओं को सदर अस्पताल में अपनी सेवाएं देने से आखिर क्यों रोका गया है, इसका जवाब सिविल सर्जन को सार्वजनिक मंच से देना होगा.
बकाया भुगतान तुरंत करने व समान मानदेय नीति लागू करने की मांग
आशा कार्यकर्ताओं ने इस सभा के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग से कई मांगें की है. उन्होंने मांग की कि आशाओं का जितना भी बकाया भुगतान है, उसे अविलंब जारी किया जाए. इसके साथ ही शहरी आशाओं से नियमित रूप से काम लिया जाए और सबसे महत्वपूर्ण बात कि शहरी व ग्रामीण आशाओं को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के अंतर को पूरी तरह खत्म कर सूबे में एक समान राशि लागू की जाए.
वामपंथी नेताओं की मौजूदगी में हुआ आंदोलन, संकल्प सभा संपन्न
इस कर्मचारी समागम को वैचारिक धार देने के लिए जिले के कई प्रबुद्ध नेता और नेत्री मौजूद रहे.
सभा को जिला नेत्री सुनीता सिंह, रानी कुमारी, भाकपा (CPI) के जिला मंत्री राज किशोर सिंह, सदर की आशा नेत्री कंचन कुमारी, प्रीति, सुप्रिया, बिंदु कुमारी, उर्मिला कुमारी, नंदनी कुमारी, मीना कुमारी और रीना कुमारी समेत कई मुखर वक्ताओं ने संबोधित किया.
सभी वक्ताओं ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए एक स्वर में कहा कि आशाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों और उनके सामाजिक सम्मान की इस लड़ाई को अब पूरे नालंदा जिले में और तेज किया जाएगा.
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