Biharsharif News : पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देश के आलोक में नालंदा जिले के नगरनौसा प्रखंड को जल की कमी वाले प्रखंड के रूप में चिन्हित किया गया है. जल संकट से निपटने और उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए प्रखंड में जल बजट और जल सुरक्षा योजना तैयार की जाएगी. इसी क्रम में जिला पंचायत संसाधन केंद्र, नालंदा में राज्य स्तरीय परियोजना प्रबंधक, जल एवं स्वच्छता की अध्यक्षता में कार्यशाला आयोजित की गई. इसमें विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों और संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.
जल की उपलब्धता और मांग का होगा आकलन
कार्यशाला में जल की उपलब्धता और विभिन्न क्षेत्रों में पानी की मांग के आधार पर सहभागी और वैज्ञानिक पद्धति से जल बजट तैयार करने की प्रक्रिया पर चर्चा की गई. उपलब्ध जल स्रोतों, उनकी स्थिति तथा वर्तमान और भविष्य की जल आवश्यकता का आकलन कर संतुलित जल प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया.
जल सुरक्षा योजना से होगा दीर्घकालिक प्रबंधन
जल बजट के आधार पर नगरनौसा प्रखंड के लिए जल सुरक्षा योजना तैयार करने के विभिन्न पहलुओं पर भी विचार-विमर्श किया गया. योजना का उद्देश्य जल स्रोतों का संरक्षण, उपलब्ध पानी का बेहतर उपयोग और भविष्य में जल संकट की स्थिति को कम करना है. जल प्रबंधन की योजना में स्थानीय लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया, ताकि स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जा सके.
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विभिन्न विभागों के पदाधिकारी और प्रतिनिधि हुए शामिल
कार्यशाला में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, वाटर फॉर पीपुल, महिला विकास निगम, लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान, वीबी-जी राम जी, ग्रामीण विकास विभाग तथा जिला पंचायत संसाधन केंद्र, नालंदा के पदाधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे. विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर जल संरक्षण और जल प्रबंधन की प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा की गई.
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स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तैयार होगी योजना
नगरनौसा को जल की कमी वाले प्रखंड के रूप में चिन्हित किए जाने के बाद जल बजट और जल सुरक्षा योजना को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तैयार करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे उपलब्ध जल संसाधनों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने और पानी के योजनाबद्ध एवं बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी. इस पहल के माध्यम से भविष्य में संभावित जल संकट से निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने और जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है.
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