मलमास मेले पर गर्मी और महंगाई की मार, कारोबार कम होने से दुकानदारों और होटल व्यवसायियों में चिंता

Malmas Mela 2026 : राजगीर के एक माह तक चलने वाले मलमास मेले के चार दिन बीत चुके हैं। धीरे-धीरे मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है. लेकिन दूर-दराज से पहुंचे दुकानदारों, झूला संचालकों, सर्कस कर्मियों और होटल व्यवसायियों के चेहरे अब भी मायूस नजर आ रहे हैं.

Malmas Mela 2026 : (कंचन कुमार) राजगीर के एक माह तक चलने वाले मलमास मेले के चार दिन बीत चुके हैं। धीरे-धीरे मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है. लेकिन दूर-दराज से पहुंचे दुकानदारों, झूला संचालकों, सर्कस कर्मियों और होटल व्यवसायियों के चेहरे अब भी मायूस नजर आ रहे हैं.

सभी को उम्मीद थी कि शुरुआती दिनों से ही बड़ी संख्या में बाहरी श्रद्धालु पहुंचेंगे, लेकिन फिलहाल ऐसा माहौल नहीं बन पाया है.

स्थानीय श्रद्धालुओं की भीड़, होटल व्यवसाय पर असर


राजगीर के एक होटल संचालक बिरेंद्र प्रसाद ने बताया कि इस बार मेले में स्थानीय श्रद्धालुओं की संख्या अधिक दिखाई दे रही है. अधिकांश लोग बाइक, स्कूटी, टोटो, ऑटो और निजी वाहनों से पहुंचकर देर रात तक मेला घूमने के बाद वापस लौट जा रहे हैं.

होटल संचालक ने क्या कहा

इसका सीधा असर होटल व्यवसाय पर पड़ा है. राजगीर के कई लग्जरी और मध्यम श्रेणी के होटलों के कमरे खाली पड़े हैं.

होटल संचालकों का कहना है कि मेले को लेकर की गई तैयारियों और खर्च के मुकाबले आमदनी बेहद कम है. कुछ लोग राजगीर मलमास मेले में अब तक बाहरी और अन्य राज्यों के श्रद्धालुओं की कम मौजूदगी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईधन बचाने और वाहनों का कम उपयोग करने की अपील से जोड़कर देख रहे हैं.

हालांकि स्थानीय होटल संचालकों और दुकानदारों का मानना है कि मेले में बाहरी श्रद्धालुओं की भीड़ आमतौर पर एक-दो सप्ताह बाद बढ़ती है. वहीं स्थानीय दुकानदार मैनेजर का कहना है कि भीषण गर्मी भी बाहरी श्रद्धालुओं के कम आगमन की बड़ी वजह है. उनका मानना है कि तापमान में कमी आने और मेले की रौनक बढ़ने के साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी आ सकती है.

अस्थायी दुकानदारों को नहीं मिल रहे खरीदार


मलमास मेले में छोला-भटूरा की दुकान चलाने वाले उत्तरी बिहार के खगड़िया निवासी विशु चौधरी ने बताया कि मेले में महंगे किराये पर अस्थायी दुकान लगाने वाले बाहरी कारोबारियों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है. आधुनिक और पारंपरिक खिलौने, रेडिमेड कपड़े, बच्चों के रंग-बिरंगे परिधान और मेहंदी जैसी मेले की पारंपरिक वस्तुएं श्रद्धालुओं को अपेक्षित रूप से आकर्षित नहीं कर पा रही हैं. कई दुकानदार दिनभर ग्राहकों का इंतजार करते नजर आ रहे हैं.

गर्मी में ठंडे पेय और फास्ट फूड की सबसे अधिक मांग


श्रद्धालु एवं वेना थाना क्षेत्र के देवबिगहा निवासी शिशुकांत ने बताया कि भीषण गर्मी के कारण मेले में सबसे अधिक बिक्री बोतलबंद पानी, नींबू पानी, शिकंजी, पैकेज्ड ड्रिंक और अन्य ठंडे पेय पदार्थों की हो रही है. इसके अलावा विभिन्न कंपनियों की आइसक्रीम और जूस बच्चों, महिलाओं और युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं। फास्ट फूड, नमकीन और हल्के नाश्ते की दुकानों पर भी अच्छी भीड़ देखी जा रही है.

महंगाई की वजह से बड़े होटल की स्थिति खराब


नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर एक स्थानीय दुकानदार ने बताया कि महंगे होटल और रेस्टोरेंट की भोजन थालियां श्रद्धालुओं को खास आकर्षित नहीं कर पा रही हैं. हालांकि विभिन्न संस्थाओं द्वारा संचालित शुद्ध शाकाहारी और सस्ते अस्थायी भोजनालयों में कुछ लोग भोजन करते नजर आ रहे हैं. लेकिन वहां भी उम्मीद के अनुसार भीड़ नहीं है. स्थानीय दुकानदारों और व्यवसायियों को अब भी उम्मीद है कि जैसे-जैसे मलमास मेले के दिन आगे बढ़ेंगे, वैसे-वैसे बाहरी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी और मेले की रौनक के साथ कारोबार में भी तेजी आएगी.

शाम ढलते ही जगमगा उठता है राजगीर मलमास मेला


राजगीर मलमास मेला स्थल पर शाम ढलते ही सर्कस, थिएटर, मौत का कुआं और झूलों की चमकदार सजावट लोगों को अपनी ओर खींचने लगती है. रंग-बिरंगी रोशनी, मनमोहक गीत-संगीत और आकर्षक उद्घोषणाओं से पूरा मेला क्षेत्र गुलजार हो उठता है. इस बार मेले में सर्कस, थिएटर, मौत का कुआं और विभिन्न प्रकार के झूले सहित मनोरंजन के लगभग सभी प्रमुख साधन पहुंचे हैं.

हालांकि मेले के चार दिन बीतने के बाद भी अधिकांश आयोजकों की सीटें पूरी तरह नहीं भर पा रही हैं. शाम बढ़ने के साथ टिकट दरों में भी कमी की जा रही है, लेकिन अधिकतर श्रद्धालु इनका आनंद बाहर से ही लेना पसंद कर रहे हैं.

थिएटर से लेकर सर्कस तक, टिकट दरें महंगी

मेले में इंडिया थिएटर, शोभा सम्राट थिएटर और पायल एक नजर थिएटर विभिन्न मनोरंजन कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे हैं। इनके टिकट 300 रुपये से लेकर 1200 रुपये तक हैं. वहीं अजूबा अजंता सर्कस और अन्य सर्कसों के टिकट 100 से 300 रुपये के बीच रखे गए हैं. जादूगर और जलपरी शो का टिकट 100 रुपये, जबकि मौत का कुआं 50 से 100 रुपये तक है. छोटे झूलों का किराया 50 से 80 रुपये तथा बड़े रोमांचक झूले, जैसे ब्रेक डांस और जायंट व्हील, 100 से 250 रुपये प्रति सवारी हैं.

बाहरी श्रद्धालुओं के आने से रौनक बढ़ने की उम्मीद

आयोजकों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बाहरी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ मेले की रौनक भी बढ़ेगी. फिलहाल स्थानीय श्रद्धालुओं की संख्या अधिक देखी जा रही है.

प्रशासन की व्यवस्था से श्रद्धालु संतुष्ट

जिला प्रशासन ने इस बार सुरक्षा, रोशनी, पेयजल और सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया है. दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह नि:शुल्क टेंट सिटी बनाई गई है. जिसकी व्यवस्था महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को अब तक काफी पसंद आ रही है.

पिछले मलमास मेले की तुलना में इस बार प्रशासन ने यातायात और पार्किंग व्यवस्था पर विशेष फोकस किया है. अब तक जाम की बड़ी समस्या देखने को नहीं मिली है. पैदल, वाहन और घुड़सवार सुरक्षा बल पूरी रात गश्त कर रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं का सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हुआ है.

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Published by: Vivek Singh

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