BiharSharif Hiranya Parvat : बिहारशरीफ जिला मुख्यालय का प्रमुख पर्यटन एवं प्राकृतिक स्थल हिरण्य पर्वत इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाल व्यवस्था का शिकार बना हुआ है. कभी मॉर्निंग वॉक, सैर-सपाटे और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध यह स्थल अब अंधेरे, गंदगी, खुले में शौच, अवैध निर्माण और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों के कारण अपनी पहचान खोता जा रहा है. खराब रखरखाव के चलते पर्यटकों और स्थानीय लोगों की संख्या लगातार घट रही है. विशेष रूप से सुबह मॉर्निंग वॉक करने वाली महिलाओं ने यहां आना लगभग बंद कर दिया है.
2.83 करोड़ की परियोजना पर फिरा पानी
वर्ष 2015 में लगभग 2 करोड़ 83 लाख रुपये की लागत से हिरण्य पर्वत का सौंदर्यीकरण कराया गया था. पार्क, झरने, हाईमास्ट लाइट, पेयजल व्यवस्था और अन्य सुविधाएं विकसित की गई थीं, लेकिन नियमित रखरखाव के अभाव में अधिकांश व्यवस्थाएं अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं. जिस पार्क में कभी प्रतिदिन करीब 500 लोग पहुंचते थे, वहां अब केवल 10 से 50 युवा-युवती ही नजर आते हैं.
अंधेरे में डूबा पर्यटन स्थल
हिरण्य पर्वत पर लगी हाईमास्ट लाइट वर्षों पहले आए तूफान में क्षतिग्रस्त हो गई थी. इसके बाद से उसकी मरम्मत नहीं हो सकी. पार्क में लगी करीब 70 प्रतिशत एलईडी लाइटें भी खराब हैं. कई जगह केवल पोल खड़े हैं, जबकि बल्ब, तार और अन्य उपकरण गायब हो चुके हैं. शाम ढलते ही पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूब जाता है, जिससे लोगों में असुरक्षा की भावना बनी रहती है.
खुले में शौच से बिगड़ रहा माहौल
पर्वत के आसपास सुबह और शाम खुले में शौच करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग तक खुले में शौच करते देखे जाते हैं. नगर निगम की ओर से सामुदायिक शौचालय बनाए जाने के बावजूद उनका उपयोग नहीं हो रहा है. कई शौचालय भी टूट-फूट और रखरखाव के अभाव में बेकार हो चुके हैं.
बंद पड़े झरने और सूखता पार्क लॉकडाउन के दौरान पानी पहुंचाने वाली मोटर खराब हो गई थी, जिसे आज तक दुरुस्त नहीं किया गया. इसके कारण वाटरफॉल सहित सभी 11 झरने बंद पड़े हैं. पानी के अभाव में पार्क की हरियाली खत्म होती जा रही है. 50 से अधिक पेयजल पाइप भी टूटकर बेकार हो चुके हैं.
अवैध निर्माण और पेड़ों की कटाई जारी
हिरण्य पर्वत पर लगातार अवैध मकानों का निर्माण हो रहा है. रोक के बावजूद कई स्थानों पर निर्माण कार्य जारी है. वहीं वर्षों पहले लगाए गए नीम, पीपल, पाकड़ और बेल जैसे पेड़ों को काटकर जलावन के रूप में उपयोग किया जा रहा है. सुरक्षा के लिए लगाई गई लोहे की जालियां भी जगह-जगह तोड़ दी गई हैं.
नशेड़ियों और जुआरियों का बढ़ता जमावड़ा
स्थानीय लोगों के अनुसार हिरण्य पर्वत पर जुआ खेलने और नशा करने वालों का दबदबा बढ़ता जा रहा है. गांजा, सिगरेट, गुटखा और अन्य मादक पदार्थों का सेवन खुलेआम किया जाता है. इससे यहां आने वाले परिवारों और युवतियों में असुरक्षा की भावना बनी रहती है.
बदहाल पड़ा गेस्ट हाउस
प्रशासनिक अधिकारियों और विशेष अतिथियों के ठहरने के लिए बनाया गया गेस्ट हाउस भी बदहाली का शिकार है. भवन में दरारें पड़ चुकी हैं. शौचालय जर्जर हो चुके हैं और कई कमरों में ताले लगे हैं. एक कमरे का उपयोग जलावन रखने के लिए किया जा रहा है. वर्तमान में इसका उपयोग नल-जल एजेंसी के कर्मियों के विश्राम स्थल के रूप में हो रहा है.
गोशालाएं भी बन रहीं हादसों की वजह
पर्वत पर बने गोशालाओं से निकलने वाला गोबर बारिश के दौरान रास्तों पर फैल जाता है, जिससे लोग फिसलकर गिर जाते हैं. कुछ माह पहले एक व्यक्ति की गोबर पर फिसलने से मौत भी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद न तो मवेशी पालकों और न ही प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाया है.
बिजली के खुले तार से हादसे का खतरा
पर्वत पर कई स्थानों पर बिजली के टूटे हुए तार, उखड़े हुए पोल और क्षतिग्रस्त पानी के पंप पड़े हैं. इससे किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है.
वन विभाग ने जल्द सुधार का दिया भरोसा
वन रेंजर सुनील कुमार ने बताया कि हिरण्य पर्वत और पार्क की सभी समस्याओं को चिह्नित किया जा रहा है. हाल ही में स्थल का निरीक्षण भी किया गया है. बिजली, पानी, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं को जल्द दुरुस्त कराया जाएगा. उन्होंने दावा किया कि अगले एक-दो माह में हिरण्य पर्वत का बदला हुआ स्वरूप लोगों को देखने को मिलेगा.
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