कभी खस्ताहाल था नालंदा का यह सरकारी स्कूल, अब निजी स्कूल छोड़ यहां पहुंच रहे बच्चे, 90 फीसदी से अधिक अटेंडेंस

Nalanda Bahadurpur School : एक समय खस्ताहाल रहा उत्क्रमित मध्य विद्यालय बहादुरपुर अब शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और उत्कृष्ट प्रबंधन के लिए जाना जाता है. स्कूल के कायापलट में अहम भूमिका निभाने वाले शिक्षक डॉ. सौरभ कुमार को शिक्षा में बेहतर योगदान के लिए राज्यस्तरीय सम्मान मिला है.

Nalanda Bahadurpur School : कभी खस्ताहाल भवन और सीमित संसाधनों के लिए पहचाने जाने वाले उत्क्रमित मध्य विद्यालय बहादुरपुर की तस्वीर अब बदल चुकी है. शिक्षा में नवाचार और विद्यालय के बेहतर प्रबंधन की वजह से स्कूल ने अपनी अलग पहचान बनाई है. इसी बदलाव और शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार के लिए विद्यालय के विशिष्ट शिक्षक व पूर्व प्रभारी प्रधानाध्यापक डॉ. सौरभ कुमार को राज्यस्तरीय शिक्षक सम्मान से नवाजा गया है.

शिक्षक दिवस पर 38 शिक्षकों को मिला राज्यस्तरीय सम्मान

पटना में शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में बिहार सरकार की ओर से टीचिंग में इनोवेशन और अनुशासन के क्षेत्र में बेहतर योगदान के लिए चयनित 38 शिक्षकों को सम्मानित किया गया. इनमें नालंदा के डॉ. सौरभ कुमार भी शामिल रहे.

निजी स्कूल छोड़ सरकारी विद्यालय में पहुंच रहे बच्चे

बहादुरपुर स्कूल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह है कि अब यहां ऐसे बच्चे भी नामांकन ले रहे हैं, जो पहले निजी स्कूलों में पढ़ते थे. सातवीं कक्षा की छात्रा प्रिया कुमारी और स्नेहा कुमारी ने बताया कि पहले जिस स्कूल में वे पढ़ती थीं, उसकी तुलना में यहां पढ़ाई और विद्यालय का माहौल बेहतर है.

खेलकूद और गतिविधियों की भी बेहतर व्यवस्था

पुलिस अफसर बनने का सपना देखने वाली छात्रा पिंकी कुमारी के अनुसार स्कूल में पढ़ाई के साथ खेलकूद और अन्य गतिविधियों की भी व्यवस्था है. इसके लिए बच्चों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है.

90 फीसदी से अधिक रहती है बच्चों की उपस्थिति

विद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति लगातार 90 फीसदी से अधिक रहती है. छात्र-छात्राएं प्रतिदिन टाई, बेल्ट और पहचान पत्र के साथ पूर्ण गणवेश में विद्यालय पहुंचते हैं. अस्थावां प्रखंड में यह इकलौता ऐसा विद्यालय बताया गया है, जिसके बच्चों ने खेल तरंग और दक्ष कार्यक्रम में 27 प्रखंडस्तरीय पुरस्कार हासिल किए हैं.

प्रतियोगिताओं में भी विद्यार्थियों ने जीते पुरस्कार

विद्यालय के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय खोज प्रतिभा प्रतियोगिता के अलावा अमृत महोत्सव के तहत आयोजित जिला स्तरीय निबंध और पेंटिंग प्रतियोगिताओं में भी कई पुरस्कार हासिल किए हैं. इससे बच्चों में पढ़ाई के साथ दूसरी गतिविधियों के प्रति भी रुचि बढ़ी है.

हर महीने होती है अभिभावकों की बैठक

विद्यालय की सफलता में ग्रामीणों और अभिभावकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही है. स्कूल में हर महीने नियमित अभिभावक बैठक आयोजित की जाती है. बैठक में मिलने वाले सुझावों पर गंभीरता से विचार कर उन्हें विद्यालय के विकास में लागू किया जाता है. इससे अभिभावकों का स्कूल के प्रति भरोसा भी बढ़ा है.

शिक्षा मंत्री से सम्मानित होते डॉ सौरभ कुमार

2012-13 में स्कूल पहुंचे डॉ. सौरभ

ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2012-13 में डॉ. सौरभ कुमार के विद्यालय में आने के बाद स्कूल की तस्वीर बदलने लगी. जिस विद्यालय का भवन कभी खस्ताहाल था, वहां उन्होंने अपने स्तर से स्मार्ट क्लासरूम की व्यवस्था कराने में अहम भूमिका निभायी.

छुट्टियों में भी स्कूल के विकास पर किया काम

वर्ष 2003 से विद्यालय में पढ़ा रहीं शिक्षिका आभा कुमारी ने बताया कि डॉ. सौरभ कुमार अपनी उच्च योग्यता के दम पर कहीं कॉलेज में जा सकते थे, लेकिन उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के इस विद्यालय को चुना. उन्होंने भीषण गर्मी की छुट्टियों में भी अपनी जेब से खर्च कर विद्यालय को बेहतर बनाने का काम किया.

शिक्षकों को काम करने की पूरी आजादी दी

विशिष्ट शिक्षक संजीव कुमार सिन्हा ने बताया कि प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में डॉ. सौरभ ने विद्यालय के विकास के लिए सभी शिक्षकों को काम करने की पूरी स्वतंत्रता दी. उन्होंने टीम भावना के साथ विद्यालय को आगे बढ़ाने का प्रयास किया. उनके अनुसार इसी वजह से उनके कार्यकाल में स्कूल ने लगातार बेहतर उपलब्धियां हासिल कीं.

2018 से 2024 तक संभाली प्रभारी प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी

डॉ. सौरभ कुमार ने वर्ष 2018 से 2024 तक विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी संभाली. राज्यस्तरीय सम्मान मिलने के बाद उन्होंने इसका श्रेय विद्यालय परिवार, साथी शिक्षकों और विद्यार्थियों की मेहनत को दिया.

शिक्षा सेवा से मिला आगे बढ़ने का संस्कार

डॉ. सौरभ कुमार के पिता भी सेवानिवृत्त प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी रह चुके हैं. शिक्षा सेवा से जुड़े पारिवारिक माहौल ने उन्हें भी शिक्षा के क्षेत्र में काम करने की प्रेरणा दी.

सरकारी स्कूलों को लेकर धारणा बदलना अगला लक्ष्य

डॉ. सौरभ कुमार का कहना है कि उनका अगला और सबसे बड़ा लक्ष्य समाज में सरकारी स्कूलों को लेकर बनी इस धारणा को बदलना है कि यहां अच्छी पढ़ाई नहीं होती. उनका कहना है कि ग्रामीण बिना किसी झिझक के अपने बच्चों को सरकारी स्कूल भेजें. सरकारी विद्यालयों के बच्चे भी बड़े और नामी निजी स्कूलों के विद्यार्थियों को कड़ी टक्कर देने में सक्षम हैं. बहादुरपुर विद्यालय की उपलब्धियां इसी बदलाव की मिसाल हैं.

Also Read : नालंदा में बाढ़ का पानी घटा, 20 अंचलों में स्थिति सामान्य, उदेरास्थान बराज के 28 फाटक बंद

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By मुकुल नाथ

मुकुल नाथ वर्ष 2017 पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. विगत 9 वर्षों से प्रभात खबर के लिए बिंद प्रखंड और आसपास के इलाकों से रिपोर्टिंग कर रहे हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >