Pearl Farming in Nalanda : केंद्र और राज्य सरकार की लाभकारी योजनाओं से नालंदा जिले के मत्स्य किसान अब मछली पालन के साथ-साथ मोती पालन कर अपनी आमदनी बढ़ा सकेंगे. मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुका नालंदा अब मोती पालन को भी व्यावसायिक रूप देने की तैयारी में है.
मत्स्य विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले में मोती पालन की तीन नई इकाइयां स्थापित करने का मुख्य लक्ष्य रखा है. इसके लिए जिले के चंडी, हिलसा और बिन प्रखंड में एक-एक विशेष यूनिट स्थापित की जाएगी. इस योजना के तहत अब तक विभाग को कुल 10 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं.
चयनित किसानों को मिलेगा अनुदान
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, चयनित किसानों को एक यूनिट स्थापित करने के लिए दो लाख 24 हजार 500 रुपये की लागत वाली परियोजना पर 60 प्रतिशत तक का सरकारी अनुदान दिया जाएगा. विभागीय मानक के अनुसार, इस मोती पालन यूनिट के लिए लाभार्थी किसान के पास कम से कम 6 एकड़ का जलक्षेत्र होना आवश्यक है.
किसान मछली पालन के साथ ही उसी तालाब में मोती पालन कर एक साथ दोहरी आय प्राप्त कर सकते हैं. इससे जलीय कृषि को नया आयाम मिलेगा और बेरोजगार युवा भी स्वरोजगार से जुड़ सकेंगे.
Nalanda News : ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू
सरकार का मुख्य उद्देश्य है कि किसान एक ही जलक्षेत्र से कई प्रकार की आय आसानी से अर्जित करें. इसके लिए इच्छुक मत्स्य किसान योजना का लाभ लेने के लिए विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों में से चयनित आवेदकों को विभाग द्वारा तकनीकी प्रशिक्षण और सरकारी सहायता भी प्रदान की जाएगी. जिले के प्रगतिशील किसान इस नई कृषि विधि को लेकर काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं.
आत्मनिर्भर बनेंगे किसान और युवा
नालंदा के जिला मत्स्य पदाधिकारी शंभू कुमार पटेल ने बताया कि मत्स्य विभाग मछली पालन को व्यावसायिक रूप देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि मोती पालन से जिले के किसान और बेरोजगार युवा आत्मनिर्भर बनेंगे तथा यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत करेगी.
विभाग का मुख्य लक्ष्य है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में मछली के साथ-साथ मोती पालन को भी बड़े पैमाने पर बढ़ावा देकर पूरे नालंदा जिले को एक बड़ा मत्स्य हब बनाया जाए.
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