राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त पहल से किसानों की हो रही डिजिटल रजिस्ट्री
बिहारशरीफ. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से जुड़े किसानों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है. अब इस योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिनके नाम पर जमीन की ऑनलाइन जमाबंदी दर्ज है. यानी अब सिर्फ वंशावली के आधार पर योजना में शामिल होने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है. अब पैसा उन्हीं को मिलेगा, जिनके नाम जमीन है. केंद्र सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना में अब गैर-रैयत यानी बटाईदार या जमीन रहित किसानों को बाहर कर दिया गया है. पहले वंशावली या परिवारिक पहचान के आधार पर किसान योजना से जुड़ जाते थे, लेकिन अब यह नियम पूरी तरह बदल गया है. अब योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिनके नाम पर जमीन की ऑनलाइन जमाबंदी उपलब्ध है. वंशावली या पारिवारिक उत्तराधिकार के आधार पर लाभ लेने की व्यवस्था बंद कर दी गई है. प्रत्येक वास्तविक किसान की पहचान के लिए एक फार्मर रजिस्ट्री आईडी तैयार की जा रही है. यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से दर्ज की जायेगी. किसानों की पहचान और रजिस्ट्रेशन के लिए राजस्व और कृषि विभाग मिलकर पंचायत स्तर पर शिविर लगा रहे हैं. इन शिविरों में राजस्व कर्मचारी जमीन से संबंधित रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज कर रहे हैं. किसान सलाहकार खेती-बाड़ी की जानकारी और योजनाओं की जानकारी दे रहे हैं. जिन किसानों के पास खुद की जमीन और रसीद है, उनकी प्राथमिकता के आधार पर रजिस्ट्री और आइडी कार्ड तैयार किए जा रहे हैं. हर किसान को एक यूनिक डिजिटल आईडी दी जाएगी. इसी आईडी के माध्यम से किसान को सरकार की योजनाओं का लाभ मिलेगा. बिना इस आइडी के अब कोई योजना, सब्सिडी या अनुदान नहीं मिलेगा. जिनके पास जमीन है, वे तुरंत पंचायत में आयोजित शिविर में जाकर अपनी रजिस्ट्री करवाएं. खसरा-खतियान, रसीद, आधार कार्ड व मोबाइल नंबर साथ लेकर जाएं. वंशावली के आधार पर अब कोई आवेदन मान्य नहीं होगा. इस बदलाव का उद्देश्य फर्जी किसानों की पहचान रोकना और वास्तविक किसानों तक ही योजना का लाभ पहुंचाना है. सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और डिजिटल ट्रैकिंग लागू करना. यह नई व्यवस्था एक तरफ जहां कुछ किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है, वहीं ईमानदार और वास्तविक किसानों के लिए यह एक सशक्त कदम है. इससे योजना का लाभ केवल उनके पास पहुंचेगा, जो वास्तव में खेती करते हैं और जिनके नाम पर जमीन है.
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