Bawan Buti Nalanada : नालंदा जिले के बसवन बिगहा गांव की प्रसिद्ध पारंपरिक 'बावन बूटी' कला को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिलने के बाद इस ऐतिहासिक शिल्प के विकास की संभावनाएं बढ़ गई हैं. वर्षों से अपनी विशिष्ट बुनाई कला के लिए पहचान रखने वाली बावन बूटी अब राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है.
केंद्रीय टीम आएगी बसवन बिगहा
शनिवार को केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय (टेक्सटाइल मंत्रालय) का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल नालंदा पहुंचकर बसवन बिगहा गांव में बावन बूटी शिल्प का निरीक्षण करेगा. प्रतिनिधिमंडल बुनकरों से संवाद कर उनकी समस्याओं, उत्पादन क्षमता और बाजार विस्तार की संभावनाओं का आकलन करेगा. साथ ही इस पारंपरिक कला को वैश्विक मंच तक पहुंचाने के लिए आवश्यक योजनाओं पर भी चर्चा की जाएगी.
साड़ियों और अन्य उत्पादों की मांग बढ़ने की उम्मीद
उद्योग विभाग के अधिकारियों ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार का उद्देश्य जीआई टैग मिलने के बाद इस विरासत कला को नई पहचान दिलाना, बुनकरों की आय बढ़ाना तथा इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना है. इसके लिए प्रशिक्षण, डिज़ाइन विकास, आधुनिक विपणन और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
स्थानीय बुनकरों ने कहा कि जीआई टैग उनके लिए नई उम्मीद लेकर आया है. उनका मानना है कि इससे बावन बूटी साड़ियों और अन्य उत्पादों की मांग बढ़ेगी. उचित मूल्य मिलेगा और युवा पीढ़ी भी इस पारंपरिक शिल्प से जुड़ने के लिए प्रेरित होगी।
गौरतलब है कि कभी राष्ट्रपति भवन से लेकर विदेशों तक अपनी पहचान बना चुकी बावन बूटी कला पिछले कुछ वर्षों से कठिन दौर से गुजर रही थी. अब जीआई टैग और केंद्र सरकार की पहल से इस ऐतिहासिक शिल्प के पुनर्जीवन की उम्मीदें मजबूत हुई हैं.
