बिहार में स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड से अब मिलेंगे सिर्फ 2 लाख, ज्यादा पैसे के लिए करना होगा ये काम

Bihar Student Credit Card: बिहार में छात्रों के लिए चल रही स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के नियम बदल गए हैं. अब इस योजना से अधिकतम 2 लाख रुपये तक का शिक्षा लोन मिलेगा. इससे ज्यादा रकम की जरूरत होने पर छात्रों को प्रधानमंत्री विद्या लक्ष्मी पोर्टल के जरिए बैंक से लोन के लिए आवेदन करना होगा.

Bihar Student Credit Card: बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने छात्रों के लिए चलने वाली स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में बड़ा फेरबदल किया है. अब इस योजना के तहत मिलने वाली 4 लाख रुपये की अधिकतम लोन राशि को घटाकर 2 लाख रुपये कर दिया गया है. उच्च शिक्षा विभाग की ओर से 19 अगस्त को जारी नए आदेश के अनुसार, अब स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड से केवल 2 लाख रुपये तक की मदद मिलेगी. यह योजना पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सात निश्चय योजना के तहत 2 अक्टूबर 2016 को शुरू की गई थी, ताकि 12वीं पास बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए आर्थिक परेशानी न हो.

अब तक 4.81 लाख से ज्यादा छात्रों के आवेदन मंजूर

योजना की शुरुआत से लेकर अब तक 4.81 लाख से अधिक आवेदन स्वीकार किए जा चुके हैं. इनमें से करीब 4.15 लाख विद्यार्थियों को लगभग 8,865 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं, जबकि कुल 15,801 करोड़ रुपये का लोन पास किया गया है.

इस योजना से राज्य और बाहर के 3,429 शिक्षण संस्थान जुड़े हैं. विभाग का कहना है कि पुरानी उपलब्धियों और अनुभवों को देखते हुए योजना को नए तरीके से ढालना जरूरी हो गया था, ताकि इसे लंबे समय तक सही तरीके से चलाया जा सके.

2 लाख रुपये से ज्यादा की जरूरत है तो यहां करें आवेदन

अगर किसी छात्र को अपनी पढ़ाई के लिए 2 लाख रुपये से अधिक का लोन चाहिए, तो उसे अब केंद्र सरकार के PM-Vidyalaxmi Portal के माध्यम से ऑनलाइन अप्लाई करना होगा. यह पूरी प्रक्रिया व्यावसायिक बैंकों के जरिए पूरी होगी, जिसमें छात्र अपनी पसंद के बैंक और शाखा को चुन सकेंगे. छात्रों की सहूलियत के लिए जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्रों (DRCC) पर मुफ्त में फॉर्म भरने की सुविधा भी दी जाएगी.

समय पर लोन चुकाने पर मिलेगी ब्याज में छूट

पहले की तरह सामान्य वर्ग के लड़कों को 4 प्रतिशत और लड़कियों, दिव्यांगों तथा ट्रांसजेंडर छात्रों को 1 प्रतिशत ब्याज देना होता था. अब 2 लाख से अधिक के लोन पर बैंक व्यवस्था लागू होगी, जिसमें पढ़ाई और मोरेटोरियम अवधि के दौरान तय शर्तों पर ब्याज में सब्सिडी मिलेगी.

जो छात्र समय पर अपनी किस्त चुकाएंगे, उन्हें 30 प्रतिशत ब्याज की छूट (Rebate) दी जाएगी. वहीं लड़कियों, दिव्यांगों और ट्रांसजेंडर छात्रों को 10 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट मिलेगी. सरकार का मकसद छात्रों में जिम्मेदारी से लोन चुकाने की आदत डालना और उनका क्रेडिट स्कोर बेहतर बनाना है.

क्या घट जाएगी उच्च शिक्षा में छात्रों की संख्या?

क्रेडिट कार्ड की सीमा घटाकर 2 लाख करने से उन गरीब छात्रों की चिंता बढ़ सकती है, जिन्हें महंगे कोर्स के लिए ज्यादा पैसों की जरूरत होती है. फिलहाल बिहार में उच्च शिक्षा में नामांकन दर (GER) केवल 17.1 प्रतिशत है, जबकि देश का औसत 28.4 प्रतिशत है. राज्य सरकार इसे बढ़ाकर 30 प्रतिशत तक पहुंचाना चाहती है. ऐसे में यह देखना अहम होगा कि बैंक से लोन लेने के नए नियमों का असर बच्चों के दाखिले पर कैसा पड़ता है.

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जानिए क्या है पीएम विद्यालक्ष्मी योजना

केंद्र सरकार ने 15 अगस्त 2015 को पीएम विद्यालक्ष्मी योजना शुरू की थी, ताकि होनहार छात्रों को पैसों की कमी के कारण पढ़ाई न छोड़नी पड़े. इसके तहत बिना किसी गारंटी और बिना कुछ गिरवी रखे लोन मिलता है. इस पर बैंक अपने हिसाब से ब्याज तय करते हैं. हालांकि, जिन परिवारों की सालाना कमाई 8 लाख रुपये तक है, उन्हें 10 लाख तक के लोन पर मोरेटोरियम अवधि में 3 प्रतिशत ब्याज छूट मिलती है. वहीं 4.5 लाख तक की आय वाले परिवारों को तय शर्तों के साथ पूरी ब्याज सब्सिडी की सुविधा मिलती है.

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लेखक के बारे में

By परितोष शाही

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.
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