Bihar Politics: बिहार में सियासी दोस्तों की तलाश में भाजपा, ऑपरेशन लोट्स के तहत BJP कर रही ये बड़ी तैयारी...

Bihar Politics: भाजपा अपने नये दोस्तों के जरिये महागठबंधन से अधिक आधार का विस्तार करना चाहती है. उसकी चिंता में यह शामिल है. सामाजिक समूहों को साधे बिना लोकसभा में बेहतर प्रदर्शन करना मुश्किल होगा.

Bihar Politics: भाजपा अपने नये दोस्तों के जरिये महागठबंधन से अधिक आधार का विस्तार करना चाहती है. उसकी चिंता में यह शामिल है. सामाजिक समूहों को साधे बिना लोकसभा में बेहतर प्रदर्शन करना मुश्किल होगा. हाल में राज्य में संवैधानिक पद पर नियुक्त एक व्यक्ति की जाति के बारे में जिस प्रकार प्रचारित किया गया, उससे यही लगता है कि वह दलित और अतिपिछड़ी जातियों के बीच अपनी भूमिका बढ़ाना चाहती है. चुनावी समर में कल तक बिहार की राजनीति में अलग-थलग पड़ जाने वाली भाजपा एक बार फिर प्रदेश में बड़ेसियासी समूह की तलाश में है. अगले होने वाले लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा सामाजिक समीकरण को साधना चाह रही है. उसकी इस तलाश में पहला सटीक निशाना उपेंद्र कुशवाहा पर आकर लगा है.

कुशवाहा देंगे भाजपा का साथ?

उपेंद्र कुशवाहा जदयू से बाहर हो चुके हैं और उन्होंने अपनी नयी पार्टी राष्ट्रीय लोक जनता दल बनायी है. माना जा रहा है कि उपेंद्र की पार्टी का अगले लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा से तालमेल होगा. स्वयं कुशवाहा ने 2024 के चुनाव के लिए नरेंद्र मोदी की तारीफ की है. जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में भाजपा कुछ और दोस्तों को जुगाड़ करने वाली है. भाजपा की नजर जिन दलों पर है, उनमें मुकेश सहनी की वीआइपी और चिराग पासवान की लोजपा भी है. उपेंद्र कुशवाहा के बहाने भाजपा प्रदेश की बड़े सामाजिक आधार वाली समूह कुशवाहा वोट बैंक को गोलबंद करना चाहती है. निषाद व मल्लाह वोट पर भी भाजपा की नजर है. इसके लिए वीआइपी के मुकेश सहनी कारगर साबित हो सकते हैं. फिलहाल केंद्र सरकार ने मुकेश सहनी की सुरक्षा बढ़ा दी है.

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चिराग और मांझी पर भी नजर

भाजपा की तीसरी दोस्त चिराग पासवान की पार्टी बन सकती है. चिराग पासवान के साथ बात बन गयी तो उन्हें लोकसभा की कुछ सीटें दी जा सकती हैं. जानकारों की राय में भाजपा की नजर पूर्व सीएम जीतन राम मांझी पर भी लगी है. अपनी सधी राजनीतिक चालें चलने में माहिर मांझी के बेटे का अगले साल विधान परिषद के सदस्य के रूप में कार्यकाल समाप्त हो रहा है. पिछले साल अगस्त महीने जदयू के भाजपा से अलग हो जाने के बाद सात विपक्षी दलों का बना महागठबंधन जमीन पर जब उतरा तो भाजपा पूरी तरह अलग हो गयी थी, लेकिन धीरे-धीरे चुनाव जैसे ही करीब आता जा रहा है, भाजपा के साथ उसके गुप्त दोस्त खुल कर बाहर आने लगे हैं.

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