Bihar Politics: बिहार की राजनीति में ‘बाहुबली’ और ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह ने एक ऐसे मोड़ पर संन्यास का ऐलान किया है, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी. सोमवार को राज्यसभा चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करने जेल से विधानसभा पहुंचे अनंत सिंह ने साफ कर दिया कि अब वे आगे कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे.
पुलिस की सुरक्षा घेरे में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने घोषणा की कि उनकी राजनीतिक विरासत को अब उनके बच्चे संभालेंगे. 6 बार के विधायक रहे अनंत सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में राज्यसभा की 5वीं सीट के लिए सियासी घमासान चरम पर है.
वोट डालकर फिर लौटे जेल
राज्यसभा चुनाव में मतदान के लिए अनंत सिंह को पुलिस सुरक्षा में जेल से बिहार विधानसभा लाया गया था. मतदान करने के बाद उन्हें वापस बेऊर जेल ले जाया गया. इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए साफ कहा कि अब वे सक्रिय चुनावी राजनीति से दूर रहेंगे.
उन्होंने कहा कि अब परिवार की अगली पीढ़ी राजनीति में आगे आएगी और चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा- उनके बड़े बेटे चुनावी राजनीति में सक्रिय होगे.
NDA की जीत का किया दावा
अनंत सिंह ने राज्यसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि एनडीए गठबंधन पूरी तरह मजबूत है और उसके सभी पांचों उम्मीदवार चुनाव जीतेंगे. उनका कहना था कि मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में एनडीए की स्थिति काफी मजबूत है और परिणाम भी उसी के पक्ष में जाएंगे.
निशांत कुमार पर भी दिया बयान
मुख्यमंत्री पद के सवाल पर भी अनंत सिंह ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार में मुख्यमंत्री बनने के सभी गुण मौजूद हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका फैसला बड़े नेता करेंगे.
जेल में रहते हुए भी दर्ज की थी जीत
अनंत सिंह पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव में मोकामा सीट से जीत हासिल कर चुके हैं. उन्होंने आरजेडी की उम्मीदवार वीणा देवी को 28,206 वोटों के अंतर से हराया था.
उन्हें कुल 91,416 वोट मिले थे, जबकि वीणा देवी को 63,210 वोट मिले थे. उस समय भी अनंत सिंह जेल में थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने चुनाव जीतकर राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया था.
दुलार चंद यादव हत्याकांड में जेल
अनंत सिंह इस समय दुलार चंद यादव हत्याकांड के मामले में जेल में हैं. आरोप है कि जन सुराज पार्टी के समर्थक दुलार चंद यादव की हत्या के मामले में उनका नाम सामने आया था.
1 नवंबर 2025 को विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद अदालत ने उन्हें बेऊर जेल में न्यायिक हिरासत में भेज दिया. फिलहाल उनकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है और इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी की जा रही है.
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