Bihar Panchayat Election: बिहार में समय पर पंचायत चुनाव कराने की मांग को लेकर पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है. गुरुवार को जस्टिस ए अभिषेक रेड्डी की बेंच ने मोहन प्रसाद चौरसिया और अन्य लोगों की याचिका पर सुनवाई की.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. दोनों को कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके चुनाव की मौजूदा स्थिति साफ करने को कहा गया है.
समय पर चुनाव कराने के लिए कोर्ट पहुंचे लोग
याचिकाकर्ताओं के वकीलों एसबीके मंगलम और अवनीश ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग के ढीले रवैये को देखते हुए उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा है.
याचिका में मांग की गई है कि मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने से पहले ही नए चुनावों की घोषणा कर दी जाए. इसके लिए संविधान और पंचायती राज कानून के नियमों का हवाला भी दिया गया है.
साल के अंत में खत्म हो रहा है 5 साल का कार्यकाल
बिहार की मौजूदा पंचायती राज संस्थाओं का 5 साल का कार्यकाल इसी साल के अंत में खत्म हो रहा है. इसी वजह से समय पर चुनाव कराने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि चुनाव की घोषणा में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की याद दिलाई, जिसमें संवैधानिक संस्थाओं के चुनाव समय पर कराने का आदेश दिया गया है.
नया परिसीमन बनने से चुनाव में हो सकती है देरी
दूसरी तरफ, राज्य में पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन का काम चल रहा है. राज्य निर्वाचन आयोग सभी जिलों में नई सीमाएं तय करने का काम आगे बढ़ा रहा है.
साल 2011 की जनगणना के आधार पर ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के क्षेत्रों की नई सीमाएं तय की जा रही हैं. इसी प्रक्रिया की वजह से चुनाव की तैयारियों में समय लग रहा है.
आरक्षण और नई वोटर लिस्ट तैयार करने में लगेगा समय
नई सीमाएं तय होने के बाद ही आरक्षण की स्थिति साफ हो पाएगी. इसके बाद एससी, एसटी, अति पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए सीटों का नया कोटा तय किया जाएगा.
आरक्षण तय होने के बाद नई वोटर लिस्ट बनाई जाएगी और वोटिंग सेंटर तय किए जाएंगे. इस पूरी प्रक्रिया में कुछ महीनों का समय लग सकता है, जिससे समय पर चुनाव होने पर सस्पेंस बना हुआ है.
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2021 में हुए थे पिछले पंचायत चुनाव
बिहार में इससे पहले पंचायत चुनाव साल 2021 में आयोजित किए गए थे. उस समय सितंबर से दिसंबर के बीच अलग-अलग चरणों में वोट डाले गए थे.
पंचायतों का कार्यकाल 5 साल का होता है और मौजूदा प्रतिनिधियों का कार्यकाल साल 2026 के अंत में पूरा होने जा रहा है. अब हाईकोर्ट में सरकार के जवाब के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ होगी.
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