Bihar News: बिहार के लोगों के लिए आने सालों में राज्य का सफर पूरी तरह बदलने वाला है. राज्य में सड़कों और पुलों के निर्माण को लेकर पटना में एक बेहद महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें एनएचएआई (NHAI) के सीजीएम एलपी पाधी ने सीधे दिल्ली से पहुंचकर 46 नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की.
इस बैठक का सबसे बड़ा और सकारात्मक संदेश यह है कि अब लटकी हुए प्रोजेक्ट को डेडलाइन के भीतर पूरा करने के लिए ‘मास्टर प्लान’ तैयार कर लिया गया है.
आमस-दरभंगा फोरलेन- इसी साल दौड़ेगी गाड़ियां
इस समीक्षा बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा आमस-दरभंगा फोरलेन को लेकर हुई. उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली इस लाइफलाइन का इंतजार कर रहे लोगों के लिए खुशखबरी यह है कि इसे दिसंबर 2026 तक हर हाल में चालू करने का लक्ष्य रखा गया है.
सीजीएम ने साफ निर्देश दिया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान चल रहे कामों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इस सड़क के शुरू होते ही पटना और दरभंगा के बीच की दूरी घंटों के बजाय मिनटों में सिमट जाएगी.
जमीन अधिग्रहण की बाधाएं अब होंगी दूर
बिहार में अक्सर बड़े प्रोजेक्ट जमीन अधिग्रहण के पेंच में फंस जाती हैं. बैठक में सीजीएम के सामने सभी 40 सक्रिय प्रोजेक्टों और 6 नई प्रोजेक्टों की प्रगति रिपोर्ट रखी गई. जिन 6 प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी हाल ही में एजेंसियों को सौंपी गई है, उनके लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज करने का निर्देश दिया गया है.
एनएचएआई (NHAI) अब राज्य सरकार के साथ बेहतर समन्वय बनाकर सीधे उन अड़चनों को दूर करेगा जो सालों से निर्माण कार्य की गति को धीमा कर रही थीं.
वाराणसी-कोलकाता और आरा-मोहनिया का स्टेटस?
बिहार से गुजरने वाली वाराणसी-कोलकाता सिक्सलेन प्रोजेक्ट और आरा-मोहनिया फोरलेन को लेकर भी बड़ी जानकारी साझा की गई है. रिपोर्ट के अनुसार, वाराणसी-कोलकाता सिक्सलेन और आरा-मोहनिया फोरलेन का काम दिसंबर 2027 तक पूरा होने की संभावना है.
वहीं, मुजफ्फरपुर-बरौनी फोरलेन के लिए जून 2028 और कन्हौली-शेरपुर छह लेन सड़क के लिए दिसंबर 2028 की समयसीमा तय की गई है. खगड़िया-पूर्णिया फोरलेन भी दिसंबर 2028 तक बनकर तैयार हो जाएगा, जिससे सीमांचल और कोसी क्षेत्र की तस्वीर बदल जाएगी.
काम में देरी तो खैर नहीं
बैठक में केवल फाइलों पर चर्चा नहीं हुई, बल्कि ठेकेदारों और एजेंसियों के साथ समन्वय को लेकर भी सख्त लहजा अपनाया गया. सीजीएम ने निर्देश दिया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में शुरू होने वाली नई प्रोजेक्टों के लिए अभी से आधार तैयार किया जाए.
इस मास्टर प्लान का मुख्य मकसद राज्य में आवागमन की ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिससे न केवल आम जनता को सुविधा मिले, बल्कि बिहार में व्यापार और निवेश के नए रास्ते भी खुलें.
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