Bihar News: बिहार में निर्माण कार्यों को गति देने और बालू की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार नए बालू घाटों की तलाश करेगी. खान एवं भूतत्व विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को संभावित जगहों की पहचान करने का निर्देश दिया है. माना जा रहा है कि इस कवायद के बाद नए बालू घाट सामने आ सकते हैं.
सरकार का फोकस सिर्फ बालू की उपलब्धता बढ़ाने पर नहीं है. अवैध खनन और परिवहन पर रोक लगाने के साथ राजस्व बढ़ाना भी इसका बड़ा उद्देश्य है.
पहले होगा जमीन पर सर्वे, फिर जियो सर्वे
नए संभावित घाटों की पहचान के बाद विभाग की टीम मौके पर जाकर जांच करेगी. इसके बाद जियो सर्वे कराया जाएगा. इससे बालू की अनुमानित मात्रा का वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया जाएगा.
सर्वे के आधार पर जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट यानी डीएसआर में जरूरी बदलाव किए जाएंगे. विभाग का लक्ष्य राज्य में करीब 8 से 10 प्रतिशत नए संभावित बालू घाटों को चिह्नित करना है.
इन इलाकों में नहीं बनेंगे नए घाट
नए घाट तय करते समय सुरक्षा और पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा जाएगा. ऐसे इलाकों को खनन के लिए नहीं चुना जाएगा, जहां जनहानि या धनहानि का खतरा हो.
नदी के कटाव वाले संवेदनशील क्षेत्रों को भी बाहर रखा जाएगा. इसके अलावा आबादी से दूरी, पानी का स्तर और बालू की ढुलाई के लिए उपलब्ध रास्तों की भी जांच होगी.
इससे कोशिश होगी कि खनन से पर्यावरण को नुकसान कम से कम हो और लोगों को भी परेशानी न हो.
जियो-फेंसिंग और GPS से होगी निगरानी
अवैध खनन और बालू की चोरी रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी. विभाग भंडारण स्थलों की जियो-फेंसिंग करेगा.
बालू ढोने वाले वाहनों की GPS के जरिए निगरानी की जाएगी. उत्खनन गतिविधियों पर भी डिजिटल नजर रखी जाएगी. इससे बालू के खनन और परिवहन की जानकारी ट्रैक की जा सकेगी.
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378 घाटों की हुई नीलामी, 78 हुए सरेंडर
बिहार में अब तक 378 बालू घाटों की नीलामी हो चुकी है. इनमें 78 घाट सरेंडर किए जा चुके हैं. संबंधित कंपनियों को ब्लैकलिस्ट भी किया गया है.
राज्य में पीली बालू के 466 और सफेद बालू के 541 घाट बताए गए हैं. हालांकि, सभी घाटों की नीलामी नहीं हो सकी है.
इसके पीछे बालू की पर्याप्त मात्रा नहीं होना, पर्यावरणीय मंजूरी में देरी और घाटों का सरेंडर होना प्रमुख कारण हैं. अब विभाग नए सिरे से नीलामी की तैयारी कर रहा है.
15 अक्टूबर के बाद फिर खुलेंगे बालू घाट
खान एवं भूतत्व विभाग के अनुसार, बिहार में 15 अक्टूबर के बाद फिर से बालू घाट खोले जाएंगे. इसके साथ नए संभावित घाटों की तलाश भी जारी रहेगी.
नए घाटों से बाजार में बालू की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है. इससे मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर कम हो सकता है. सरकार को राजस्व मिलने के साथ निर्माण क्षेत्र को भी गति मिलेगी.
विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, नए घाट खुलने से राज्य का राजस्व बढ़ेगा. साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
