बिहार में 45 दिन चलेगा विशेष अभियान, 5 लाख जमाबंदी में गड़बड़ी, कहीं खाता तो कहीं खेसरा-नाम गलत

Bihar Jamabandi Sudhar: बिहार में जमीन के रिकॉर्ड से जुड़ी गड़बड़ियों को दूर करने के लिए सरकार 45 दिन का विशेष अभियान चलाने जा रही है. करीब 5 लाख जमाबंदी में खाता, खेसरा, प्लॉट या रैयत का नाम गलत दर्ज है. अब इन रिकॉर्ड को दुरुस्त करने की प्रक्रिया तेज होगी.

Bihar Jamabandi Sudhar: (कृष्ण कुमार, पटना) बिहार में जमीन के रिकॉर्ड से जुड़ी बड़ी संख्या में गड़बड़ियां अब भी लोगों के लिए परेशानी बनी हुई हैं. करीब पांच लाख जमाबंदी में खाता, खेसरा, प्लॉट या रैयत का नाम गलत दर्ज है. इन गलतियों के कारण जमीन मालिक अपनी ही जमीन से जुड़े कई काम नहीं करा पा रहे हैं.

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अब इन मामलों के समाधान के लिए 45 दिन का विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है. इसका मकसद लंबित जमाबंदियों में दर्ज गलतियों को दूर करना है.

कहीं खाता गलत तो कहीं रैयत का नाम दर्ज

जमाबंदी में अलग-अलग तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं. कई मामलों में खाता नंबर गलत दर्ज है. कुछ में खेसरा या प्लॉट की जानकारी गलत है. वहीं कई जमाबंदियों में रैयत का नाम ही गलत दर्ज कर दिया गया है.

गलतियों के चलते बड़ी संख्या में जमाबंदियों को लॉक भी कर दिया गया है. ऐसी स्थिति में जमीन मालिक राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पोर्टल पर अपनी जमीन का सही विवरण नहीं देख पा रहे हैं.

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कई जमाबंदी दो-तीन साल से लॉक

सूत्रों के अनुसार, कई अंचलों में रजिस्टर-2 के पन्ने फटे या गायब होने की वजह से भी जमीन का सही विवरण नहीं मिल सका. कुछ मामलों में रजिस्टर-2 में जमाबंदी को गलत या अवैध तरीके से बदलकर नई जमाबंदी तैयार कर दी गई.

इसके आधार पर दाखिल-खारिज भी कर दिया गया और मालगुजारी की रसीद तक काट दी गई. बाद में ऐसे मामलों में अपीलीय प्राधिकार न्यायालयों ने न्यायोचित फैसला और आदेश भी दिया. इसके बावजूद जमाबंदी में सुधार नहीं हो सका.

ऐसी कई जमाबंदियां अब भी दो-तीन साल या उससे ज्यादा समय से लॉक हैं. इससे जमीन मालिकों की परेशानी लगातार बनी हुई है.

रजिस्टर-2 के मामलों में जमाबंदी पुनर्गठन

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने रजिस्टर-2 के फटे या गायब पन्नों जैसी समस्याओं के समाधान के लिए अंचलों को जमाबंदी पुनर्गठन का निर्देश दिया है.

इसके बावजूद बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं. लोगों ने सुधार प्रक्रिया में शामिल होने की कोशिश भी की. कुछ दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी कई मामलों में सुधार नहीं हो सका.

जमीन बेचने से लेकर लोन लेने तक परेशानी

जमाबंदी में गड़बड़ी का असर सीधे जमीन मालिकों पर पड़ रहा है. रिकॉर्ड सही नहीं होने के कारण लोग अपनी जमीन पर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी झेल रहे हैं.

इसके अलावा जमीन पर ऋण लेने, बिक्री या खरीद जैसे काम भी प्रभावित हो रहे हैं. अब 45 दिन के विशेष अभियान से इन लंबित मामलों के निपटारे की उम्मीद है.

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लेखक के बारे में

By अभिनंदन पांडेय

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.
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