Bihar Free Coaching: बिहार में मैट्रिक और इंटर की परीक्षा में असफल विद्यार्थियों के लिए राहत की खबर है. बिहार सरकार अब ऐसे छात्रों को दोबारा परीक्षा की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग देगी. यह व्यवस्था इसी साल से शुरू करने की तैयारी है.
कोचिंग में छात्रों को विशेषज्ञ शिक्षकों से पढ़ने का मौका मिलेगा. खास बात यह होगी कि सभी छात्रों को एक जैसी पढ़ाई नहीं कराई जाएगी. जिस विषय में छात्र कमजोर है, उसी के अनुसार उसकी तैयारी कराई जाएगी.
फेल हुए छात्रों का जुटाया जा रहा आंकड़ा
शिक्षा विभाग फिलहाल मैट्रिक और इंटर में अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रमंडलवार आंकड़ा जुटा रहा है. इससे विभाग को यह पता चलेगा कि किस क्षेत्र में कितने विद्यार्थी दोबारा परीक्षा देंगे. साथ ही यह भी देखा जाएगा कि विद्यार्थी किन-किन विषयों में असफल हुए हैं. इसी जानकारी के आधार पर कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी.
जिस विषय में फेल, उसी पर रहेगा पूरा फोकस
मुफ्त कोचिंग की सबसे खास बात इसका विषय आधारित प्लान होगा. उदाहरण के तौर पर अगर कोई छात्र गणित में असफल हुआ है, लेकिन बाकी विषयों में उसके अंक अच्छे हैं, तो उसकी तैयारी में गणित पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा.
पिछली परीक्षा में छात्र को मिले अंकों का भी आकलन किया जाएगा. इससे यह पता लगाया जाएगा कि छात्र की कमजोरी कहां है और उसे किस तरह की तैयारी की जरूरत है.
यानी सिर्फ परीक्षा में फेल होने के आधार पर पढ़ाई नहीं कराई जाएगी. छात्र के पुराने प्रदर्शन को देखकर उसकी तैयारी का तरीका तय होगा.
स्कूल के आसपास ही बनाए जाएंगे कोचिंग सेंटर
शिक्षा विभाग की कोशिश है कि छात्रों को कोचिंग के लिए बहुत दूर न जाना पड़े. इसके लिए स्कूलों के आसपास ही कोचिंग सेंटर बनाए जाने की तैयारी है. मैट्रिक और इंटर में असफल छात्रों के लिए एक ही केंद्र पर पढ़ाई की व्यवस्था की जा सकती है.
इससे छात्रों को आने-जाने में परेशानी नहीं होगी. साथ ही उनके समय और पैसे दोनों की बचत होगी.
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ऑनलाइन पढ़ाई की भी होगी सुविधा
मुफ्त कोचिंग सिर्फ ऑफलाइन तक सीमित नहीं रहेगी. विद्यार्थियों को ऑनलाइन माध्यम से भी परीक्षा की तैयारी कराने की योजना है. विशेषज्ञ शिक्षक जरूरी शैक्षणिक सामग्री भी उपलब्ध कराएंगे. इससे छात्र कोचिंग के अलावा घर पर भी अपनी तैयारी जारी रख सकेंगे.
छोटे-छोटे टेस्ट से पता चलेगा कितना तैयार हुआ छात्र
कोचिंग के दौरान विद्यार्थियों की तैयारी सिर्फ क्लास के आधार पर नहीं परखी जाएगी. समय-समय पर छोटे-छोटे टेस्ट लिए जाएंगे. इससे यह पता लगाया जाएगा कि छात्र ने कितना सीखा है और किन हिस्सों में अभी कमजोरी बनी हुई है.
अगर किसी विषय में छात्र लगातार कमजोर प्रदर्शन करता है, तो उस पर दोबारा विशेष ध्यान दिया जाएगा. इसका मकसद अंतिम परीक्षा से पहले ही छात्रों की कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करना है.
कोचिंग सेंटर की होगी नियमित निगरानी
शिक्षा विभाग के स्थानीय अधिकारी भी कोचिंग सेंटरों पर नजर रखेंगे. अधिकारी यह देखेंगे कि कक्षाएं नियमित रूप से चल रही हैं या नहीं. छात्र वास्तव में कोचिंग का लाभ ले रहे हैं या नहीं, इसका फीडबैक भी लिया जाएगा. इससे विभाग को यह पता चलता रहेगा कि योजना जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से चल रही है.
अभिभावकों से भी बच्चों को कोचिंग से जोड़ने की अपील
शिक्षा विभाग अभिभावकों से भी अपील करेगा कि वे अपने बच्चों को इस मुफ्त कोचिंग व्यवस्था से जरूर जोड़ें. विभाग का उद्देश्य सिर्फ छात्रों को दोबारा परीक्षा में बैठाना नहीं है. कोशिश यह है कि पिछली परीक्षा में जहां कमी रह गई, उसे पहचानकर उस पर काम किया जाए.
